पड़ोसी देश भूटान से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली और डरावनी प्राकृतिक आपदा की खबर सामने आ रही है। हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव और प्राकृतिक असंतुलन के बीच भूटान में एक बहुत बड़ा हादसा हुआ है। भूटान के पुनाखा (Punakha) क्षेत्र में स्थित एक ग्लेशियर झील (Glacial Lake) अचानक फट गई है, जिसके चलते भारी मात्रा में पहाड़ों का पानी निचले इलाकों की तरफ बह निकला है। इस भयानक जलप्रलय के कारण भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर असम (Assam) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) के सीमावर्ती जिलों में अचानक बाढ़ (Flash Flood) आने का गंभीर और विकराल खतरा मंडराने लगा है। भारत के सुरक्षा और प्रशासनिक तंत्र ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है और अब तक लगभग 15 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस ग्लेशियर के फटने की पूरी घटना क्या है और भारत के किन इलाकों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।
भूटान के पुनाखा में रात के सवा आठ बजे फटा ग्लेशियर, संकोष नदी में आया उफान
प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह प्राकृतिक आपदा भूटान के पुनाखा क्षेत्र में गुरुवार की रात को घटी। भारतीय समयानुसार रात करीब सवा आठ बजे वहां एक ग्लेशियर झील अचानक फट गई, जिससे भारी मात्रा में जमा हुआ पानी तेज गति से नीचे की ओर पहाड़ों से उतरने लगा। झील का यह उग्र पानी बहते हुए रात के समय ही संकोष नदी (Sankosh River) के तक्तसिमाखांग (Taktisimakhang) इलाके तक जा पहुंचा।
रात के अंधेरे में अचानक आई इस जल राशि के कारण स्थानीय स्तर पर भारी अफरातफरी मच गई। घटना की गंभीरता को भांपते हुए भूटान प्रशासन और भारतीय एजेंसियों ने तुरंत अलर्ट जारी कर दिया। तक्तसिमाखांग स्थित पनबिजली परियोजना कार्यालय और गासा छाचू (Gasa Chachu) क्षेत्र में तैनात सेना के जवानों को तुरंत सुरक्षित ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने का निर्देश दिया गया। गनीमत यह रही कि इस अचानक हुई घटना में समय रहते चेतावनी मिल जाने के कारण किसी भी प्रकार के जानमाल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है, लेकिन पानी का तेज बहाव निचले इलाकों के लिए अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
पश्चिम बंगाल और असम में हाई अलर्ट, अलीपुरद्वार से 15 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया
भूटान में ग्लेशियर झील फटने की इस घटना के तुरंत बाद भारत के पड़ोसी राज्यों पश्चिम बंगाल और असम में प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड (Alert Mode) पर आ गया है। पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार (Alipurduar) जिले में संकोष नदी के किनारे बसे कई संवेदनशील गांवों में तुरंत मुनादी कराई गई और राहत दल उतारे गए।
प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए अलीपुरद्वार जिले के भलका एक, भलका दो, चेंगमाड़ी और लैंड ग्राम पंचायत जैसे नदी तटीय इलाकों से लगभग 15,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में शिफ्ट कर दिया है। चूंकि यह घटना रात के वक्त घटी, इसलिए अंधेरा होने के कारण बाढ़ के पानी की सही मात्रा और उसकी रफ्तार का सटीक आकलन शुरुआती घंटों में नहीं हो सका था। इसके चलते पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और असम के धुबरी (Dhubri) जिले में प्रशासन ने किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
प्रशासन की सख्त चेतावनी: नदी के करीब न जाएं, अफवाहों से पूरी तरह बचें
स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों ने संकोष नदी के आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। लोगों से लगातार यह अपील की जा रही है कि वे किसी भी सूरत में नदी के घाटों या निचले किनारों के नजदीक न जाएं और पूरी तरह सतर्क रहें।
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि नदी के जलस्तर में अचानक कोई असामान्य वृद्धि दिखाई देती है, तो लोग तुरंत स्थानीय पुलिस या आपदा प्रबंधन प्रशासन को इसकी सूचना दें। सभी संबंधित ग्राम पंचायतों, ब्लॉक अधिकारियों और पुलिस बलों को 24 घंटे स्थिति पर कड़ी नजर रखने का आदेश दिया गया है। स्थिति की नजाकत को देखते हुए अलीपुरद्वार के स्थानीय सांसद मनोज तिग्गा ने भी जनता से अपील की है कि प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है और किसी भी तरह की अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें।
जलवायु परिवर्तन का बढ़ता खतरा और हिमालयी झीलों की संवेदनशीलता
यह घटना एक बार फिर से इस बात की याद दिलाती है कि ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) और जलवायु परिवर्तन के कारण हमारे हिमालयी क्षेत्र कितने संवेदनशील और खतरे की जद में आ चुके हैं। तापमान बढ़ने के कारण पहाड़ों पर मौजूद ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे उनके ऊपर बनने वाली झीलें (Glacial Lakes Outburst Floods – GLOF) कमजोर होकर अचानक फट जाती हैं। इस प्रकार की आपदाएं बिना किसी पूर्व चेतावनी के आती हैं और पल भर में भारी तबाही मचा सकती हैं। फिलहाल, भारत और भूटान के बीच आपसी समन्वय के जरिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, और भारतीय सीमा में किसी भी बड़े नुकसान को टालने के लिए सभी सुरक्षा उपाय कड़ाई से लागू कर दिए गए हैं।
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