युवाओ में मीडिया के प्रति भरोसा बहाल करने की ज़िम्मेवारी पत्रकारो पर है : प्रो० चौधरी

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दरभंगा : बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन दल के सचेतक प्रोफेसर बिनय कुमार चौधरी ने कहा कि आज के दौड़ में पत्रकारों को विश्वसनीयता का वह पैमाना स्थापित करना होगा जिससे युवाओं का मीडिया पर भरोसा बहाल हो सके।
मंगलवार को सागर फैमिली रेस्टोरेंट के सभागार में ख्यातिलब्ध पत्रकार स्वर्गीय राम गोविंद प्रसाद गुप्ता की 91वीं जयंती के अवसर पर आयोजित “भारत में जेन जी का भविष्य और पत्रकारों की भूमिका” विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रोफेसर बिनय कुमार चौधरी ने कहा कि जेन-जी अखबारों और टेलीविजन की लंबी बहसों के बजाय रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स, इन्फोग्राफिक्स और पॉडकास्ट के माध्यम से खबरें देखना पसंद करती है। ऐसे में पत्रकारों को जटिल विषयों को कम समय में सरल, आकर्षक और दृश्य माध्यमों के जरिए प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में फर्जी खबरों और डीपफेक का खतरा बढ़ा है। पत्रकारों की जिम्मेदारी तथ्यों की जांच कर सही जानकारी उपलब्ध कराने और युवाओं का मीडिया पर विश्वास बनाए रखने की है।
मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार विष्णु कुमार झा ने कहा कि भारत में जेन-जी का भविष्य देश को आधुनिक, जागरूक और तकनीकी रूप से उन्नत राष्ट्र बनाने की दिशा तय करेगा। इस पीढ़ी को सही दिशा देने और लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए जिम्मेदार एवं विश्वसनीय पत्रकारिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जेन-जी के दौर में पत्रकारिता के पारंपरिक तरीके पर्याप्त नहीं रह गए हैं। पत्रकारों को बदलती तकनीक के अनुरूप स्वयं को ढालने के साथ ही सनसनीखेज खबरों से बचकर तथ्यों की प्रामाणिकता और पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहां कि युवाओं से जुड़ने और सजग समाज के निर्माण के लिए पत्रकारों को अपनी भूमिका नए सिरे से परिभाषित करनी होगी। जिम्मेदार पत्रकारिता युवाओं को किसी विचारधारा का अनुयायी बनाने के बजाय तथ्यों के आधार पर सोचने, सवाल पूछने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करती है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं शिक्षाविद् डॉ. हरिनारायण सिंह ने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी देश के भविष्य की दिशा तय कर रही है। डिजिटल क्रांति के बीच पली-बढ़ी जेन-जी की सोच और सूचना प्राप्त करने के तरीके पिछली पीढ़ियों से अलग हैं। ऐसे में युवाओं तक सही जानकारी पहुंचाने और भविष्य निर्माण में पत्रकारों की भूमिका महत्वपूर्ण होने के साथ चुनौतीपूर्ण भी है। प्रो. सिंह ने कहा कि जेन-जी नई सोच के साथ ऊंची उड़ान भरने का सपना देखने वाली पीढ़ी है। यह तनाव और दबाव से मुक्त होकर अपनी शर्तों पर जीवन जीना चाहती है। इस पीढ़ी के सपने पारंपरिक रूप से डॉक्टर या इंजीनियर बनने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह डिजिटल क्षेत्र में नए अवसरों और संभावनाओं के साथ आगे बढ़ना चाहती है। यह कार्यस्थल पर सख्त आदेशों और लंबे समय तक काम करने की बाध्यता से मुक्त होकर जीवन और काम के बीच संतुलन बनाने के साथ अपनी कमाई के अनुरूप खर्च करने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि समाज को जेन-जी की सोच और आकांक्षाओं को सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार करते हुए उसे सहयोग देना चाहिए। नई पीढ़ी के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाने के बजाय उसे खुले आकाश में उड़ान भरने का अवसर देना चाहिए।
प्रख्यात चिकित्सक डॉ. ए. के. गुप्ता ने कहा कि जेन-जी तकनीक के साथ पली-बढ़ी पीढ़ी है, जिसके जीवन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सोशल मीडिया और कोडिंग की महत्वपूर्ण भूमिका है। भविष्य में देश के तकनीकी उद्यमों और डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में इस पीढ़ी की अहम भागीदारी होगी। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, मानसिक स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर जेन-जी मुखर है। यह पीढ़ी पारंपरिक रोजगार के विकल्पों के साथ उद्यमिता, स्वतंत्र कार्य, सामग्री निर्माण और गिग अर्थव्यवस्था को भी प्राथमिकता दे रही है। नैतिक मूल्यों और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के प्रति उसका दृष्टिकोण बाजार और कंपनियों को भी प्रभावित कर रहा है।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ स्व. रामगोविंद प्रसाद गुप्ता के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। संगोष्ठी में डॉ. ओम प्रकाश, डॉ. मित्रनाथ झा और डॉ. कृष्ण कुमार सहित अन्य वक्ताओं ने भी विचार व्यक्त किए।
विषय प्रवेश डॉ. रामचंद्र ‘चंद्रेश’ ने कराया।
मंच संचालन डॉ. ए. डी. एन. सिंह ने किया। अतिथियों का स्वागत पत्रकार प्रदीप गुप्ता ने किया, जबकि  धन्यवाद ज्ञापन प्रमोद गुप्ता ने किया। मौके पर शहर के अनेक प्रबुद्ध नागरिक एवं पत्रकार उपस्थित थे।
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