आरएमआरआई में 18 जिलों के अधिकारियों ने डोसियर पर किया मंथन

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  • दो दिवसीय समीक्षा बैठक बुधवार को हुआ समाप्त 
  • कामिश पोर्टल पर शत प्रतिशत डेटा की प्रविष्टि करने की सलाह
पटना। बिहार को कालाजार मुक्त घोषित करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने अपनी कवायद तेज कर दी है। राजेंद्र मेमोरियल चिकित्सा विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आरएमआरआई), पटना में चल रही दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे और अंतिम दिन बुधवार को राज्य के शेष 18 जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों ने शिरकत की। स्वास्थ्य विभाग और पिरामल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कालाजार उन्मूलन के दावों की पुष्टि के लिए ‘डोसियर’ (दस्तावेजीकरण) तैयार करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देना है। बैठक के दूसरे दिन अररिया, अरवल, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, मुंगेर, पूर्णिया, सारण और सीतामढ़ी के जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। साथ ही मुजफ्फरपुर स्थित केएएमआरसी के प्रतिनिधियों ने भी तकनीकी इनपुट साझा किए। बैठक में जिलों के प्रतिनिधियों ने अपने जिलों में बन रहे डोसियर को लेकर प्रस्तुति भी दी।
डेटा की शुद्धता पर जोर
समीक्षात्मक बैठक में मौजूद आरएमआरआई, पटना के निदेशक डॉ. कृष्णा पांडेय ने कहा कि बिहार ने भले ही 2022 में उन्मूलन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर प्रमाणित करने के लिए डोसियर का मजबूत होना अनिवार्य है। राज्य कार्यालय की तरफ से डोसियर बनाने एवं अन्य रिपोर्टिंग बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ एन.के. सिन्हा ने जिलों से आए अधिकारियों को कामिश पोर्टल पर डेटा की शत प्रतिशत रिर्पोटिंग सटीक सुनिश्चित करने, पिछले तीन वर्षों के केस लोड, छिड़काव (आईआरएस) की स्थिति और सर्विलांस का पूरा रिकॉर्ड व्यवस्थित करने सहित मरीजों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का कोई भी भुगतान लंबित न रखने को निदेशित किया।
पीकेडीएल और एक्टिव केस सर्च पर फोकस
पिरामल फाउंडेशन के तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. इंद्रनाथ बनर्जी ने बताया कि मुख्य कालाजार के साथ-साथ चमड़ी का कालाजार (पीकेडीएल) एक बड़ी चुनौती है। बैठक में पूर्व में अधिक केस वाले जिलों को वहां एक्टिव केस सर्च अभियान को और तेज करने पर सहमति बनी। बैठक के दौरान पिरामल फाउंडेशन के तकनीकी विशेषज्ञों ने डोसियर निर्माण में आ रही तकनीकी शंकाओं का समाधान भी किया।
उपलब्धियों को प्रमाणित करने का समय 
विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्टेट एनटीडी कोऑर्डिनेटर डॉ. राजेश पांडेय ने कहा कि ने कहा कि यह समय शिथिलता बरतने का नहीं बल्कि अपनी उपलब्धियों को प्रमाणित करने का है। यदि किसी भी जिले में संदिग्ध मरीज मिलता है, तो उसे तत्काल चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए ताकि संक्रमण की कड़ी को पूरी तरह तोड़ा जा सके।
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