नाईट ब्लड सर्वे के सफल संपादन को सुनिश्चित करने के लिए जिलों के लैब तकनीशियन को दिया गया प्रशिक्षण 

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  • 14 एमडीए जिलों के 2-2 लैब तकनीशियन किये गए प्रशिक्षित 
  • 10 प्री-टास जिलों के भी 2-2 लैब तकनीशियन किये गए प्रशिक्षित  
पटना- आगामी 10 अगस्त से राज्य के 14 चयनित जिलों में एमडीए कार्यक्रम संचालित किया जाना है. इसके पूर्व सभी चयनित जिलों के दो दो प्रखंडों में माइक्रो फ़ाइलेरिया दर को जानने के लिए नाईट ब्लड सर्वे कराया जायेगा. संगृहीत रक्त के नमूनों की सटीक एवं त्रुटिरहित जांच सुनिश्चित करने के लिए चयनित 14 जिलों के लैब तकनीशियन के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आज क्षेत्रीय कार्यालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में शुभारंभ किया गया. इस बाबत अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, फ़ाइलेरिया डॉ. परमेश्वर प्रसाद ने पहले ही पत्र जारी किया था.
माइक्रो फाइलेरिया दर निर्धारित करेगा जिले में एमडीए कार्यक्रम का संचालन:
क्षेत्रीय कार्यालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरीय क्षेत्रीय निदेशक डॉ. कैलाश ने बताया कि नाईट ब्लड सर्वे की रिपोर्ट तय करती है कि उक्त जिले में एमडीए कार्यक्रम संचालित किया जायेगा अथवा नहीं. यदि माइक्रो फ़ाइलेरिया दर 1 प्रतिशत से कम आती है तो उक्त जिले में ट्रांसमिशन अस्सेस्मेंट सर्वे (टास) कराय जाता है. उन्होंने कहा कि संगृहीत रक्त के नमूनों की सटीक एवं त्रुटिरहित जांच सुनिश्चित करने में लैब तकनीशियन की भूमिका अहम् होती है. उन्होंने कहा कि लैब टेक्निशियन की एक दिवसीय प्रशिक्षण काफ़ी प्रभावशाली साबित होगा एवं इससे एमडीए का बेहतर कवरेज भी सुनिश्चित हो सकेगा.
प्री टास जिलों के लैब तकनीशियन भी किये गए प्रशिक्षित:
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एनटीडी स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. राजेश पांडेय ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यशाला में 14 एमडीए जिलों के साथ 10 प्री-टास जिलों के 39 इम्प्लीमेंटेशन यूनिट के लैब तकनीशियन को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है. 10 प्री-टास जिले क्रमशः कटिहार, खगड़िया, जहानाबाद, बेगूसराय, सहरसा, सुपौल, पूर्वी चंपारण, सिवान, बांका एवं भागलपुर के कुल 39 प्रखंडों/शहरी क्षेत्रों (इम्प्लीमेंटेशन यूनिट) में नाईट ब्लड सर्वे कराया जायेगा.
दो बैचों में दिया जा रहा प्रशिक्षण:
जारी पत्र के अनुसार 5 एवं 6 जून को दो बैचों में लैब तकनीशियन को प्रशिक्षित किया जा रहा है. नाईट ब्लड सर्वे के दौरान ब्लड सेंपल एकत्रित किये जायेंगे और उसके बाद माइक्रो फाइलेरिया दर निकाला जाएगा. इससे यह पता चल पाएगा कि जिले के चयनित प्रखंडों में फाइलेरिया संक्रमण प्रसार की वर्तमान स्थिति क्या है. साथ ही इससे एमडीए कार्यक्रम का प्रभाव एवं भविष्य में इसकी जरूरत का अंदाजा भी लगेगा.
अगस्त में 14 जिलों में संचालित होगा एमडीए कार्यक्रम:
राज्य के 14 जिलों अररिया, भोजपुर, बक्सर, किशनगंज, मधेपुरा, मधुबनी, पटना, पुर्णिया, रोहतास, समस्तीपुर, लखीसराय, दरभंगा, नालंदा एवं नवादा में 10 अगस्त से एमडीए अभियान चलाया जायेगा. ज्ञात हो कि भारत सरकार ने फ़ाईलेरिया उन्मूलन लक्ष्य वर्ष 2030 से घटाकर 2027 कर दिया है। इसलिए यह आवश्यक हो गया है कि एमडीए कार्यक्रम को मज़बूती से चलाया जाय। बिहार ने इसके लिये कार्यक्रम के मुख्य स्तंभ जो कि माइक्रो फ़ाईलेरिया दर को जानना है को मज़बूत करने के लिए राज्य स्तर पर लैब तकनीशियन के प्रशिक्षण का आयोजन कर रही है।
इस अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के एनटीडी स्टेट को-ऑर्डिनेटर डॉ. राजेश पांडेय, केयर इंडिया से बासब रूज, क्षेत्रीय कार्यालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय डॉ. रवि शंकर तथा अन्य पदाधिकारीगण मौजूद रहे.
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