मुजफ्फरपुर की बेटी ने जिले का नाम किया रौशन, पहले प्रयास में 13 वां रैंक लाकर बनी APO

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कहते है मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है
इस पंक्ति को चरित्राथ कर दिया है मुजफ्फरपुर की बेटी उजमा फातिमा ने,
उजमा फातिमा ने अपने परिवार का ही नही बलकी पुरे मुजफ्फरपुर जिले का नाम रौशन कर दिया।
आपको बता दे कि अपने पहले प्रयास में ही बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सहायक लोक अभियोजन पदाधिकारी के पद पर मुजफ्फरपुर जिले के उजमा फातिमा का चयन हुआ है। उन्होंने 13 वां रैंक हासिल किया है। उजमा मूल रूप से जिले के मुशहरी प्रखंड के पक्की सराय की रहने वाली है।

उजमा दसवी तक की पढ़ाई जिले के संत जेवियर्स स्कूल से की है जबकि बारहवीं की पढ़ाई सन शाइन स्कूल से की है। स्नातक वर्ष 2019 में लॉ कॉलेज, देहरादून से की है। वही से एलएलएम की पढ़ाई भी की है।

जुलाई महीने में उजमा के पिता का देहांत हो गया है। उजमा ने बताया कि पिता के देहांत के बाद वो काफी टूट गई थी। बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और उनके ख्वाब को हकीकत में बदलकर लड़कियों को पैगाम दिया है कि हालत कितना भी मुश्किल हो खुद को कमजोर नहीं होने देना चाहिए । उन्होंने बताया कि जिवन में जितना भी मुश्किल आए उसका  डटकर मुकाबला करना चाहिए । उजमा ने कहा कि कामयाबी हासिल करने के लिए दौलत और शोहरत की नहीं बल्कि हौसले की जरूरत होती है। हमने बगैर ट्यूशन बगैर कोचिंग के घर में रहकर खुद से पढ़ाई कर यह मुकाम हासिल किया है जिसमें मेरे इकलौते भाई मोहम्मद अब्दुल्ला सुलेमान छोटी बहन सिदरा फातिमा, मां रूबी निषात , मामा शाह आलम शब्बू का भरपूर सहयोग मिलता रहा। उन्होने कहा कि अगर घर में रहकर सिर्फ 4 से 6 घंटे मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई की जाए और इस पर फोकस किया जाए तो निश्चित रूप से कामयाबी मिलेगी ।

उजमा ने बताया कि वो कॉलेज के दिनों से ही वो हायर ज्यूडिशियल की तैयारी कर रही थी। वो खुद से पढ़ाई करती थी। वे यूट्यूब से गाइड लेती रहती थी। कॉलेज के प्रोफेसर और सीनियर से भी उसको काफी मदद मिली है। उजमा ने प्रथम प्रयास में भी एग्जाम पास कर लिया है।

वही इस मौके पर समाज सेवी प्रवीण कुमार ने कहा कि पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष शाह आलम शब्बू की भाजी ने यह मुकाम हासिल कर बिहार का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि बेटी समाज की होती है पर्दा प्रथा को ताक पर रखकर एपीओ के पद पर चयन होना मुश्किल भरा काम था जिसको उन्होंने पूरा किया है। समाजसेवी प्रवीण कुमार ने उजमा को गुलदस्ता भेंट कर बधाई दिया है।

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