बिहार से आंध्र प्रदेश कैसे पहुंचीं 5 नाबालिग सहेलियां

Live News 24x7
8 Min Read

बिहार के सीमांचल इलाके से एक ऐसी हैरान करने वाली और फिल्मी कहानी जैसी घटना सामने आई है जिसने पुलिस प्रशासन, खुफिया एजेंसियों और आम जनता के होश उड़ा दिए हैं। अमूमन छोटे बच्चों या नाबालिगों के घर से बिना बताए कहीं चले जाने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, लेकिन जब एक साथ पांच नाबालिग सहेलियां अपने घरों से कुछ ही दूरी पर स्थित दुर्गा पूजा का मेला घूमने के नाम पर निकलती हैं और अगले ही पल बिहार से करीब पंद्रह सौ किलोमीटर दूर सीधे दक्षिण भारत के राज्य आंध्र प्रदेश में जा पहुंचती हैं, तो यह मामला किसी गहरे रहस्य से कम नहीं लगता। कटिहार जिले के मनसाही थाना क्षेत्र से जुड़ा यह सनसनीखेज मामला इन दिनों पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है। किसी को समझ नहीं आ रहा है कि आखिर बिना मोबाइल फोन या किसी बड़े साधन के इतनी कम उम्र की पांचों बच्चियां इतनी लंबी दूरी का सफर तय करके आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले तक कैसे पहुंच गईं। इस जटिल पहेली को सुलझाने के लिए कटिहार पुलिस ने युद्ध स्तर पर अभियान चलाया और महज कुछ ही घंटों के भीतर इस रहस्य से पर्दा उठाते हुए सभी बच्चियों को सकुशल अपने कब्जे में ले लिया, लेकिन इसके पीछे की असली पृष्ठभूमि ने कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दुर्गा पूजा मेला घूमने निकली थीं पांचों सहेलियां, और फिर हो गईं पूरी तरह से लापता

यह पूरी घटना शारदीय नवरात्रि के दौरान बीते दिनों की है जब हर तरफ दुर्गा पूजा की धूम मची हुई थी और लोग उत्सव के उल्लास में डूबे हुए थे। कटिहार जिले के मनसाही थाना अंतर्गत आने वाले एक स्थानीय गांव से अलग-अलग परिवारों की पांचों नाबालिग लड़कियां शाम के वक्त मनसाही हाट और रंगरा चौक के आसपास लगने वाले दुर्गा पूजा पंडाल व मेला घूमने के लिए अपने घरों से निकली थीं. परिवार के लोगों को तनिक भी यह आभास नहीं था कि यह साधारण सी शाम उनके जीवन की सबसे बड़ी चिंता का सबब बनने वाली है। जब काफी देर रात तक बच्चियां अपने घर वापस नहीं लौटीं, तो परिजनों की बेचौनी बढ़ने लगी. उन्होंने पहले अपने स्तर पर आसपास के रिश्तेदारों, जान-पहचान के लोगों और संभावित ठिकानों पर तलाश शुरू की, लेकिन उनका कहीं कोई अता-पता नहीं चला. जब रात बीतने के बाद भी बच्चियों का कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई और किसी अनहोनी या बहला-फुसलाकर ले जाने की आशंका जताते हुए उन्होंने तुरंत स्थानीय मनसाही थाने में लिखित आवेदन देकर न्याय और अपनी बच्चियों की सुरक्षित बरामदगी की गुहार लगाई.

कटिहार पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित एसआईटी और तकनीकी सर्विलांस का कमाल

एक साथ पांच नाबालिग लड़कियों के अचानक गायब हो जाने की इस घटना को कटिहार जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक ने बेहद गंभीरता से लिया और इसे सर्वोच्च प्राथमिकता के दायरे में रखा. मामले की नजाकत को भांपते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर फौरन सदर एसडीपीओ के नेतृत्व में एक विशेष अनुसंधान दल यानी एसआईटी (SIT) का गठन किया गया. एसआईटी की इस विशेष टीम में साइबर सेल और तकनीकी शाखा के चुनिंदा तेज-तर्रार पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया, जिन्होंने बिना एक पल गंवाए वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी साक्ष्यों को खंगालना शुरू किया. पुलिस ने सबसे पहले संभावित रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगालना शुरू किया. तकनीकी सर्विलांस और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जब पुलिस की सुई आगे बढ़ी, तो जो तथ्य सामने आए उन्होंने खुद पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया. तकनीकी जांच से यह पुख्ता सुराग मिल गया कि पांचों नाबालिग लड़कियां किसी स्थानीय ट्रेन में सवार होकर बिहार की सीमाओं को पार कर चुकी हैं और दक्षिण भारत की ओर तेजी से आगे बढ़ रही हैं.

आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम तक पहुंचने का सफर और आरपीएफ की मदद से हुआ बड़ा खुलासा

पुलिस की तहकीकात जैसे-जैसे आगे बढ़ी, यह साफ होता चला गया कि बच्चियों का यह सफर किसी सुनियोजित योजना या अचानक लिए गए किसी किशोरवय निर्णय का परिणाम था। कटिहार पुलिस ने तुरंत आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले की स्थानीय पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) से संपर्क साधा और एक बेहतरीन अंतर-राज्यीय पुलिस समन्वय का परिचय दिया. कटिहार से लेकर श्रीकाकुलम तक आरपीएफ और स्थानीय पुलिस ने युद्ध स्तर पर जाल बिछाया और आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम रेलवे स्टेशन पर जैसे ही ट्रेन पहुंची, सुरक्षा बलों ने तत्परता दिखाते हुए पांचों नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित अपनी हिरासत में ले लिया. पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, केस दर्ज होने और जांच शुरू होने के महज छह से चौबीस घंटे के भीतर इतनी लंबी दूरी तय कर चुकी बच्चियों को ढूंढ निकालना किसी चमत्कार से कम नहीं था. जैसे ही श्रीकाकुलम से यह सूचना कटिहार पुलिस को मिली, वैसे ही लापता बच्चियों के परिजनों की जान में जान आई और पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली. सभी बच्चियां पूरी तरह से सुरक्षित और स्वस्थ बताई जा रही हैं, जिन्हें वापस लाने के लिए मनसाही थाने की एक विशेष पुलिस टीम आंध्र प्रदेश के लिए पहले ही रवाना हो चुकी है.

क्या यह कोई सोची-समझीय साजिश थी या किशोरवय का नासमझ कदम, पुलिस कर रही है गहनता से जांच

हालांकि पांचों बच्चियों की सकुशल बरामदगी से एक बहुत बड़ी अनहोनी टल गई है और प्रशासन ने राहत महसूस की है, लेकिन इस पूरे मामले में कई ऐसे अनसुलझे पहलू हैं जिनकी गहराई से जांच करना अभी बाकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिना किसी पर्याप्त पैसे, बिना स्मार्टफोन और बिना किसी बाहरी परिचित के इतनी कम उम्र की पांच सहेलियां आखिर अकेले इतनी लंबी यानी करीब पंद्रह सौ किलोमीटर की यात्रा तय करके आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम तक कैसे पहुंच गईं. क्या इसके पीछे किसी मानव तस्करी गिरोह (Human Trafficking Syndicate) का हाथ था जो नाबालिगों को बहला-फुसलाकर दूसरे राज्यों में धकेलने की फिराक में था, या फिर यह सोशल मीडिया के प्रभाव या किसी फिल्मी शैली से प्रेरित होकर किशोरवय अवस्था में उठाया गया कोई नासमझ और आत्मघाती कदम था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब बच्चियों को पूरी सुरक्षा के साथ कटिहार वापस लाया जाएगा, तब बाल कल्याण समिति (CWC) के मनोवैज्ञानिकों की मौजूदगी में उनसे विस्तार से पूछताछ की जाएगी और उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। इस घटना ने एक बार फिर से सभी अभिभावकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आधुनिक दौर में बच्चों की गतिविधियों, उनकी संगति और उनके मानसिक बदलावों पर नजर रखना कितना ज्यादा जरूरी हो चुका है, ताकि वे इस तरह के खतरनाक और जोखिम भरे फैसलों से दूर रह सकें।

38
Share This Article
Leave a review

Leave a review

Your email address will not be published. Required fields are marked *