बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर जन सुराज का बड़ा दांव

Live News 24x7
4 Min Read

बिहार की सियासत में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का नारा लेकर उभरी प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की अगुवाई वाली जन सुराज पार्टी (Jan Suraaj Party) ने राज्य विधान परिषद (MLC Elections) की आठ सीटों पर होने जा रहे चुनावों के लिए अपने सभी उम्मीदवारों के नामों का ऐलान करके मुकाबले को बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय बना दिया है। पारंपरिक तौर पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के बीच सिमटने वाले इस चुनाव में जन सुराज के उतरने से पुराने समीकरण ध्वस्त होते नजर आ रहे हैं। प्रशांत किशोर ने जिस तरह से स्नातक और शिक्षक क्षेत्रों की इन आठों सीटों पर समाज के प्रबुद्ध और पेशेवर चेहरों को मौका दिया है, उससे पारंपरिक राजनीतिक दलों के स्थापित दिग्गजों की सांसें अटकी हुई हैं। इस चुनाव को राज्य के आगामी बड़े राजनीतिक परिदृश्य के ट्रेलर के रूप में देखा जा रहा है।

स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का गणित, इन 8 सीटों पर हो रहा है कड़ा मुकाबला

विधान परिषद की जिन आठ सीटों के लिए यह चुनावी घमासान जारी है, उनमें से चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (Patna, Tirhut, Darbhanga और Kosi) और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र (Patna, Saran, Tirhut और Darbhanga) शामिल हैं। इन सीटों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ आम चुनाव की तरह जातिगत या बाहुबल का असर सीधे काम नहीं करता, बल्कि यहाँ मुख्य रूप से शिक्षित मतदाता, स्नातक डिग्रीधारक और शिक्षक ही वोट डालते हैं। जन सुराज ने पटना स्नातक से डॉ. अनुज सिंह, तिरहुत स्नातक से डॉ. विमोहन कुमार, पटना शिक्षक से डॉ. दिव्या ज्योति और तिरहुत शिक्षक क्षेत्र से भूषण झा जैसे उच्च शिक्षित और समाज में पकड़ रखने वाले प्रत्याशियों पर भरोसा जताया है। यही वजह है कि पारंपरिक दलों को अपनी पुरानी जमीन खिसकने का डर सताने लगा है।

किन मुद्दों पर टिकी हैं बिहार के मतदाताओं की नजरें? शिक्षा, रोजगार और शिक्षकों का सम्मान बना मुख्य एजेंडा

जन सुराज और प्रशांत किशोर ने इस बार के एमएलसी चुनाव में किसी भी तरह के पुराने और घिसे-पिटे राजनीतिक दांव-पेचों के बजाय सीधे तौर पर जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों को केंद्र में रखा है। पार्टी का पूरा प्रचार अभियान तीन प्रमुख स्तंभों पर टिका है—गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षकों की समस्याओं का स्थायी समाधान। बिहार में लंबे समय से लंबित शिक्षकों के वेतनमान, मानदेय, नियमितीकरण और शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार के मुद्दों को जन सुराज के उम्मीदवारों ने जोर-शोर से उठाया है। इसके साथ ही बिहार से युवाओं का पलायन रोकना और स्नातक पास युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना भी प्रशांत किशोर की मुख्य चुनावी घोषणाओं में शामिल है।

दिग्गजों की साख दांव पर, आगामी सियासी भविष्य का लिटमस टेस्ट बने यह चुनाव

इस चुनाव के नतीजे न केवल जन सुराज के राजनीतिक सफर का भविष्य तय करेंगे, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बड़े नेताओं की साख की भी कड़ी परीक्षा लेंगे। जिस तरह से सत्ताधारी जेडीयू-बीजेपी गठबंधन और विपक्षी राजद ने अपनी पूरी ताकत इन सीटों को बचाने में झोंक दी है, उससे साफ है कि वे जन सुराज के बढ़ते प्रभाव को कतई हल्के में नहीं ले रहे हैं। मतदाता भी इस बार पारंपरिक दलीय वफादारी से ऊपर उठकर उम्मीदवार की योग्यता और मुद्दों को देखकर फैसला लेने के मूड में नजर आ रहे हैं। अब यह तो चुनाव परिणामों के दिन ही स्पष्ट हो पाएगा कि बिहार का प्रबुद्ध वर्ग प्रशांत किशोर के ‘जन सुराज’ मॉडल पर मुहर लगाता है या पारंपरिक राजनीति पर ही अपना भरोसा कायम रखता है।

22
Share This Article
Leave a review

Leave a review

Your email address will not be published. Required fields are marked *