10 फरवरी से शुरू होगा जिले का सबसे बड़ा दवा सेवन महाभियान

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  • 418 आशा कार्यकर्ताओं और 209 ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर टीमों को किया गया तैनात
  • 11 तारीख को लगेगा एमडीए मेगा कैंप
​वैशाली। जिले को फाइलेरिया (हाथीपांव) जैसी गंभीर और दिव्यांग बनाने वाली बीमारी से सुरक्षित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक निर्णायक जंग की घोषणा कर दी है। फाइलेरिया उन्मूलन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आगामी 10 फरवरी से जिले के दो प्रखंडों (महुआ और चेहरकलां) में सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) महाभियान की शुरुआत की जा रही है। इस महाभियान की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 11 फरवरी को आयोजित होने वाले मेगा एम.डी.ए. कैंप का राज्य स्तरीय उद्घाटन स्वयं स्वास्थ्य मंत्री द्वारा किया जाएगा। ये बातें शनिवार को सिविल सर्जन डॉ. श्याम नंदन प्रसाद ने सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) और जिला स्वास्थ्य समिति के सहयोग से  आयोजित मीडिया कार्यशाला में  साझा करते हुए बताया कि विभाग का लक्ष्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर उसे सुरक्षित करना है।
​आंगनवाड़ी केंद्रों पर विशेष शिविर और घर-घर दस्तक:
सफलता के लिए जिला स्वास्थ्य समिति ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। जिला वीबीडीसी पदाधिकारी डॉ. गुड़िया ने बताया कि 11 फरवरी को जिले के लगभग 50 प्रतिशत आंगनवाड़ी केंद्रों पर विशेष मेगा कैंप लगाए जाएंगे। इन कैंपों में स्वास्थ्यकर्मी अपनी सीधी निगरानी में पात्र लोगों को दवा का सेवन कराएंगे। मेगा कैंप के समापन के बाद भी यह अभियान थमेगा नहीं; अगले 14 दिनों तक प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी पात्र व्यक्ति दवा लेने से छूट न जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ये दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और रक्तचाप व मधुमेह जैसी बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति भी इनका सेवन कर सकते हैं।
​महुआ और चेहराकलां ब्लॉक में तैयारियों का भारी बंदोबस्त:
डॉ गुड़िया ने बताया कि आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान के तहत चेहराकलां और महुआ ब्लॉक में व्यापक इंतजाम किए गए हैं। महुआ ब्लॉक में 3,03,126 और चेहराकलां में 1,39,568 पात्र आबादी को लक्षित किया गया है। इन दोनों क्षेत्रों में कुल मिलाकर 418 आशा कार्यकर्ताओं और 209 ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर टीमों को तैनात किया गया है। दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने 13 लाख से अधिक डीईसी और इवरमेक्टिन गोलियों का स्टॉक आवंटित किया है। शहरी क्षेत्रों के लिए महुआ में विशेष रूप से 21 ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर टीमें काम करेंगी ताकि घनी आबादी वाले वार्डों को कवर किया जा सके।
​मरीजों की प्रेरणा से बढ़ेगी दवा की स्वीकार्यता:
अभियान को एक मानवीय चेहरा देने के लिए ‘सीएचओ लीड पीएसपी को भी जोड़ा गया है। फाइलेरिया की पीड़ा झेल रही वीणा देवी जैसी जागरूक महिलाएं अब समुदाय में स्वयंसेवक की भूमिका निभा रही हैं। कार्यशाला में यह बात उभर कर आई कि जब एक मरीज खुद अपनी आपबीती सुनाकर दवा खाने की सलाह देता है, तो आम जनमानस में दवा के प्रति हिचकिचाहट कम होती है। एएनएम और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का मानना है कि इन मरीजों की सक्रियता से अभियान को जमीनी स्तर पर बड़ी मजबूती मिलेगी।
​आपात स्थिति से निपटने के लिए रैपिड रिस्पांस टीम तैयार
दवा सेवन के दौरान या उसके बाद किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सहायता के लिए स्वास्थ्य विभाग ने ब्लॉक स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) का गठन किया है। महुआ ब्लॉक में मेडिकल ऑफिसर डॉ. राज दुर्गेश नंदन प्रसाद (9905946838) और डॉ. नवीन कुमार (7631340941) के साथ एएनएम पूजा कुमारी और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी चंद्र प्रकाश चक्रवर्ती मोर्चा संभालेंगे। वहीं, चेहराकलां ब्लॉक की टीम में मेडिकल ऑफिसर डॉ. मनीष कुमार (7903268306), डॉ. विनय कुमार (9572549200) और डॉ. कल्पना आनंद (7070506089) के अलावा फार्मासिस्ट मो. मतलब, जीएनएम रेखा कुमारी श्रीवास्तव और अनिल कुमार शामिल हैं। इन सभी के नंबर सार्वजनिक किए गए हैं ताकि आपात स्थिति में तुरंत संपर्क किया जा सके।
​सावधानियां और बचाव ही है एकमात्र उपचार:
डॉ गुड़िया का कहना है कि फाइलेरिया एक संक्रमित मच्छर के काटने से होता है और एक बार होने पर व्यक्ति को जीवन भर के लिए दिव्यांग बना सकता है। इससे बचने का एकमात्र तरीका लगातार पांच वर्षों तक साल में एक बार दवा का सेवन करना है। अभियान के दौरान 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति वृद्ध या गंभीर बीमार व्यक्तियों को दवा का सेवन नहीं करना है। स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि दवा खाने के बाद यदि मामूली मितली या चक्कर महसूस हो तो घबराएं नहीं, क्योंकि यह शरीर के भीतर सूक्ष्म परजीवियों के मरने का संकेत है। दो जागरूकता रथ को भी रवाना किया गया जो महुआ और चेहरकलां में प्रचार प्रसार करेगा। जिला लिड पिरामल पीयूष कुमार, ने संपूर्ण कार्यक्रम के बारे में अपडेट किया।
कार्यशाला में सी.एस डॉ श्याम नंदन प्रसाद, डीवीबीडीसीओ डॉ गुड़िया कुमारी, फाइलेरिया प्रभारी पशु चिकित्सक अमित कुमार, जिला लिड पिरामल पीयूष कुमार, वीडीसीओ अनिकेत , वीसीडीसी कुमार धीरेन्द्र सहित अन्य लोग मौजूद थे।
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