धन के गबन व दुरुपयोग पर कैग ने जताई चिंता!
- बिहार के एक तिहाई बजट को नीतीश मोदी ने मिलकर लूटा, कैग की रिपोर्ट पर बोले गप्पू राय
मोतिहारी,1 अगस्त अशोक वर्मा जिला कांग्रेस मुख्यालय गांधी आश्रम में जिलाध्यक्ष ई० शशिभूषण राय उर्फ गप्पू राय ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि आज मैं बिहार को एक खुशखबरी देने आया हूं जिसकी जानकारी बिहार के लोगों को भी नहीं है। बिहार में विकास हो गया और पुल बन गए, 24 घंटे बिजली मिलने लगी, शिक्षा, रोजगार सब मिलने लगा लेकिन ये बिहार के आम लोगों को पता ही नहीं है क्योंकि बिहार के सरकार के पास इसका हिसाब ही नहीं है, जिसका खुलासा कैग की रिपोर्ट में बाहर आया। 70 हजार करोड़ रुपए का घोटाला बिहार में मोदी और नीतीश कुमार की सरकार ने किया ये भारत सरकार की कैग ने अपने रिपोर्ट में कही है। बिहार सरकार के विभिन्न विभागों ने 70 हजार करोड़ का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जमा ही नहीं किए तो बिहार को प्रधानमंत्री मोदी के कहे लाखों करोड़ के चुनावी वादों में से 70 हजार करोड़ रुपए तो खर्च करने का आंकड़ा मिल गया।
ई० गप्पू राय ने कहा कि बिहार का कुल बजट का एक तिहाई बजट लगभग 70हजार करोड़ मोदी और नीतीश ने मिलकर लापता कर दिया, जिससे बिहार के विकास के लिए कई काम हो सकते थे। उन्होंने कहा कि बिहार में कभी जर्जर पुल, खंडहर में तब्दील हो रहे सरकारी भवन और बदहाल व्यवस्था देखेंगे तो याद कीजियेगा कि 70 हजार करोड़ के घोटाले की देन है।
साथ ही जिलाध्यक्ष ने कहा कि 31 मार्च 2024 तक बिहार सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा 49,649 उपयोग प्रमाणपत्र (UCs) उपलब्ध नहीं कराया गया। इन UCs की कुल राशि ₹70,877.61 करोड़ है।
आज़ाद भारत के इतिहास में इतना बड़ा डाका आज तक नहीं डाला गया जितना बिहार में भाजपा-जेडीयू सरकार ने गरीबों के हक़ पर डाल दिया है वो भी छोटा मोटा नहीं 70 हज़ार करोड़ का।
हाल ही में कैग ने अपनी रिपोर्ट स्टेट फाइनेंस रिपोर्ट नंबर-1 2025 विधान सभा में रखी है और उसमें यह आशंका जाहिर की गई है कि गरीबों के नाम पर विभिन्न योजनाओं में 70,877.61 क़रोड़ रू गबन कर लिया गया है । कैग ने पाया है कि बिहार सरकार के पास इस बात का कोई लेखा जोखा नहीं है कि ये पैसे कहाँ खर्च किए गए गए है । इन सत्तर हज़ार करोड़ रू से अधिक राशि को खर्च करने के 49,649 उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध ही नहीं है । इन प्रमाण पत्रों को कानूनन राशि खर्च करने के 18 माह में बनाना चाहिए मगर 10 वर्षों से अधिक की अवधि से इन पैसों का कोई हिसाब किताब नहीं है।
इतना ही नहीं, बिहार की भाजपा-जेडीयू की नाकारा सरकार ने बीते पाँच सालों की बजट राशि में से 3,59,667 करोड़ रू की राशि खर्च ही नहीं की। आश्चर्यजनक बात यह है कि इस राशि में लगभग 40% हिस्सा केंद्र प्रायोजित योजनाओं का है , जो सामाजिक कल्याण की योजनाएं हैं।
1. उपयोगिता प्रमाण पत्रों (UCs) का 70 हज़ार करोड़ के घोटाले का खेल :
बिहार कोष कोड, 2011 का नियम 271 (e) यह निर्देश देता है कि उपयोगिता प्रमाण पत्र (UCs) GIA (Grant-in-Aid) के निर्गमन की तिथि से 18 महीने के भीतर जमा किया जाना चाहिए। यदि GIA बिल के निर्गमन के 18 महीने बीत जाने के बाद भी UCs लंबित हैं, तो वित्त विभाग के विशेष आदेश के बिना अगली GIA कोषागारों द्वारा पारित नहीं की जाएगी।
मगर आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी भाजपा-जेडीयू सरकार ने नियमों को ताक में रखकर यह खेल खेला।
31 मार्च 2024 तक अनुपलब्ध उपयोगिता प्रमाण पत्रों की स्थिति तालिका में दी गई है:
Year-wise break up of outstanding UCs as on 31.03.2024
(₹ in crore)
Year*
Number of UCs
Amount
Up to 2016-17
2,647
14,452.38
2017-18
525
3,746.64
2018-19
542
5,870.67
2019-20 and 2020-21
27,041
17,980.24
2021-22
15,348
16,014.34
2022-23
3,546
12,813.34
Total
49,649
70,877.61
कुछ प्रमुख विभाग-वार उपयोगिता प्रमाण पत्र (UCs) जो AG (A&E) को 2023-24 तक प्राप्त नहीं हुए उनको बताते हुए उन्होंने कहा कि सहकारिता विभाग में
804.69 करोड़ रुपए, स्वास्थ्य 860.33 करोड़ रुपए, पिछड़ा एवं अति पिछड़ा कल्याण विभाग में 911.08 करोड़ रुपए, सामाजिक कल्याण विभाग में 941.92 करोड़ रुपए, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग में 1,397.43 करोड़ रुपए, कृषि विभाग में 2,107.63 करोड़ रुपए, ग्रामीण विकास विभाग में 7,800.48 करोड़ रुपए, शहरी विकास विभाग में 11,065.50 करोड़ रुपए, शिक्षा विभाग में 12,623.67 करोड़ रुपए और सबसे ज्यादा पंचायती राज विभाग
28,154.10 करोड़ रुपए का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जमा ही नहीं किया गया है।
बिहार की भाजपा-जेडीयू सरकार के आकंठ भ्रष्टाचार में डूबने के प्रमाण सामने आए हैं। सरकार ने बच्चों की शिक्षा, अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग का कल्याण, किसानों और शहरी विकास के विभागों को भी नहीं छोड़ा। कैग ने अपनी रिपोर्ट में राशि के गबन होने तक की आशंका जताई है।
बजट की सुर्खियों से सरोकार, गरीबों की विकास योजनाओं पर किया वार
भाजपा-जेडीयू सरकार ने बिहार के दलित-शोषित, पिछड़े, अति पिछड़े, बच्चे, महिलाओं, अल्पसंख्यकों के विकास की योजनाओं को इतना बड़ा आघात पहुँचाया है, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। बीते पाँच सालों में बिहार की भाजपा जेडीयू सरकार ने 3,59,667 करोड़ रुपए की बजट की प्रावधान राशि को खर्च ही नहीं किया। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं का था, जिसके तहत सीधे समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्तियों का विकास सुनिश्चित किया जाना था।
निम्न चार्ट में बीते पांच सालों (2019-20 से 2023-24) में बजट का प्रावधान और खर्च नहीं की गई राशि का उल्लेख है।
(₹ in crore)
S. No.
Description
2019-20
2020-21
2021-22
2022-23
2023-24
1.
Total Budget
2,28,487.18
2,45,522.62
2,65,396.87
3,01,686.46
3,26,230.12
2.
Savings
78,845.26
77,607.22
71,194.67
66,509.62
65,512.05
उपरोक्त चार्ट से भाजपा-जेडीयू सरकार की अकर्मण्यता सिद्ध होती है।
उदाहरण के लिए, दो योजनाओं का उल्लेख किया गया है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में यह पाया है कि अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, अति-पिछड़ा वर्ग, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऐसे कई विभाग हैं, जिनकी योजनाओं में कोई राशि खर्च ही नहीं की गई। नीचे उल्लिखित चार्ट में उदाहरण के लिए दो योजनाओं का जिक्र किया गया है।
Budget Proposal and non-utilization (savings)
(₹ in crore)
Sarv Shiksha Abhiyan (SSA)
2021-22
2022-23
2023-24
Total Budget
Savings (in%)
Total Budget
Savings (in%)
Total Budget
Savings (in%)
Total
10,569.84
4,819.03 (45.59)
11,535.67
5,970.85 (51.76)
12,134.32
5,776.07 (47.60)
Mid-Day Meal (MDM)
Total
1917.40
778.96 (40.63)
3025.70
1,735.77 (57.37)
3,068.78
2094.15 (68.24)
केंद्र प्रायोजित योजनाएं, वो योजना हैं, जिसमें बच्चों की शिक्षा, नागरिकों के स्वास्थ्य, एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग की छात्रवृत्ति, होस्टल निर्माण, शहरी विकास, प्रधानमंत्री आवास, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पोषण आहार जैसे लोक महत्व की योजनाएं शामिल हैं। निम्न तालिकाओं से इस बात का आभास होता है कि कैसे भाजपा-जेडीयू की सरकार ने समाज के पिछड़े हुए लोगों को और पीछे धकेल दिया।
केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं में बजट का प्रावधान और वास्तविक खर्च की स्थिति:
2019-20
2020-21
2021-22
2022-23
2023-24
Total Budget
63,972.95
63,568.48
74,487.50
89,037.68
78,514.04
Actual Expenditure
33,209.41
34,748.16
42,673.36
57,670.22
46,850.36
इस प्रेस वार्ता में जिला यूवा प्रभारी ओमप्रकाश कुशवाहा, प्रो० विजय शंकर पाण्डेय, शैलेन्द्र कुमार सिंह, धनंजय तिवारी,बजेन्द्र तिवारी,रंजन शर्मा, सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहें।
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