प्रकृति के रौद्र रूप पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं जेपी सेनानी अमर ने देश के  बिहार के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर देश में आपात सहायता व्यवस्था की गुहार की

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  अशोक वर्मा
मोतिहारी : मौसम की आक्रामक सथिति से आज दुनिया बेहाल है। मानव जिंदगियों के साथ-साथ पशुधन कृषि क्षेत्र जंगल और पहाड़ इन सभी जगह पर प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ जो मानव बसाहट एवं इंफ्रास्ट्रक्चर है सब के सब आज मौसम के चरम रडार पर हैं
परिणाम हम सभी देख और भुगत रहे हैं
आज दुनिया के बागडोर जिन शक्तिशाली हाथों में केंद्रित है वह भी मौसम के चुनौतियों के सामने बेबस और लाचार दिखने लगे हैं क्योंकि दुनिया के इन्हीं शक्तिशाली नेताओं ने आज पूरी मानव सभ्यता के सामने जीवन जीने की चुनौती उत्पन्न कर दी है जिन उद्योग जगत के इशारों पर दुनिया के यह शक्तिशाली नेता प्रकृति प्रदत्त संसाधनों के दोहन और लूट तंत्र को विकसित करने में लगे हैं जगह-जगह से अपनी ताकत के बल पर उजड़ने तबाह करने में धरती के संसाधनों को दोहन करने में दिन-रात लगे हैं क्या यह उसका प्रतिफल नहीं है दुनिया के आधे हिस्से में अपनी दादागिरी जमाने के नाम पर   युद्ध की भट्टी में धकेल दिया है और दूसरी ओर इंसानों को कुछ ताकतवर देश के लोग अपने देश से उन्हें बेघरवार करने पर तुले हैं आज बीजिंग पश्चिमी पंजाब प्रांत पाकिस्तान के हिस्से वाली और भारत के अधिकांश हिस्सों में जिस प्रकार मौसम अपना रूद्र रूप दिख रही है उससे समय रहते शासक वर्ग प्रशासन के लोग और नागरिक समुदाय सचेत होकर प्रकृति के और धरती के संरक्षण की दिशा में यदि कम नहीं बढ़ाया तो आने वाला समय और भी विनाशकारी साबित हो सकता है आज हमारी स्थिति यह है कि बातें तो हम बहुत करते हैं लेकिन नदियों किनारो के बसाहट को या फिर उसके एक परिवार को भी उसके घर को सुरक्षित करने की हमारी क्षमता नहीं दिखती और दावे तो हम खूब करते हैं हमारे सारे दावे जो है भोजपुरी गंगा नदी के किनारे भागलपुर गंगा नदी के किनारे बसी आबादी को बचाने में बौना साबित हुआ है , देश में बढ़ रहा है ।प्राकृतिक विपदा के सामने प्रशासनिक व्यवस्था बौना साबित हो रहा है ,अतः लगातार प्राकृतिक प्रकोप के दौर में सरकारी राहत व्यवस्था में भी नवीनता लानी होगी।इस मानवीय कार्य मे संवेदनशील लोगों को लगाना होगा।सिर्फ प्रशासन या सरकार  के बड़े पद पर बैठ जाना संवेदनशीलता का प्रमाण नहीं होता है बल्कि दिल के अंदर संवेदनशीलता होनी चाहिए।आज मानव के ऊपर  लगातार जो प्रकृति का हमला हो रहा है वह दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है इसलिए प्रशासन एवं सरकार को उनके प्रति विशेष संवेदनशील होना पड़ेगा।
एक तरफ जल प्रहार है दूसरी तरफ पानी के लिए हाहाकार है।
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