गो सेवा से बड़ी नहीं है कोई और सेवा : रमाकांत

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  • कहा, गो संवर्धन से सुधरेगा पर्यावरण व लोगों की सेहत
  • सनातन परंपरा में हैं गौ माता का बड़ा स्थान
बलिया। गो सेवा से बढ़ कर दुनिया में कोई और सेवा नहीं है। गाय के शरीर, उसके दूध, दही, घी, गोबर व गो मूत्र से आम जन की सेहत भी सुधरती है। पर्यावरण भी शुद्ध होता है। यह बातें रविवार को शहर के पीडब्ल्यूडी डाक बंगले में गोसेवा आयोग के सदस्य रमाकांत उपाध्याय ने कही।
उन्होंने कहा कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि गायों का संरक्षण व संवर्धन किया जाय। गो
मूत्र के लाभों के बाबत जानकारी देते हुए कहा कि गो मूत्र औषधीय गुणों से युक्त होता है। इसके उपयोग से हृदय रोग से निजात मिलती है। मनुष्य को पेशाब में होने वाली परिशानियां भी दूर होती है तथा गोमूत्र के सेवन से धमनियों में रक्त का दबाव स्वाभाविक होने लगता है। यही नहीं इसके सेवन से भूख बढ़ती है। पुराने
चर्म रोग दूर होते हैं तथा अनेकों बीमारियों में यह लाभदायक है। बताया कि गाय के गोबर पर वैज्ञानिकों द्वारा किए गए रिसर्च के बाद जानकारी दी गई कि वायुमंडल में प्राणवायु आक्सीजन की अधिकतम मात्रा 21 प्रतिशत है। भारत के किसी भी गांव में 18 से 19 प्रतिशत से ज्यादा नहीं है और शहरों
में तो 11 से 12 प्रतिशत तक ही है। बताया कि भारतीय गाय के ताजा गोबर में आक्सीजन की मात्रा 23 प्रतिशत होती है। इसे सूखा कर कंडा उपला बना देने पर आक्सीजन की मात्रा बढ कर 27 प्रतिशत हो जाती है। इसे जला देने पर मात्रा 30 प्रतिशत तथा भस्म बना देने पर 46.6 प्रतिशत हो जाती है। बताया कि इस प्रक्रिया को इसी तरह आगे बढाते जाने से आक्सीजन की मात्रा बढ कर 60 प्रतिशत तक हो जाती है। कहा कि पशुपालकों द्वारा निराश्रित गायों के संवर्धन के लिए सरकार हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दे रही है। इसके पूर्व उन्होंने विश्व हिंदू परिषद गोरक्षा विभाग के भनुप्रकाश पांडेय व अरविंद पांडेय के साथ गोशालाओं का निरीक्षण किए।
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