अशोक वर्मा
विनाश के दौर में धर्म परायण लोग ही रहेंगे सुरक्षित –चंचल बाबा
मोतिहारी: रेलवे स्टेशन से सटे पश्चिम-भाग मे लगभग 5 दशक से भक्ति ,ज्ञान आध्यात्म एवं चमत्कारी लाभ मिलने के कारण पूरे देशो में भी ख्याति प्राप्त पारंबा सेवा शक्ति पीठ में इस वर्ष गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भव्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है ।इसके लिए आश्रम परिसर में 23 जून से लगातार भजन कीर्तन एवं सीताराम धुन गुंजायमान है। संपूर्ण पीठ परिसर में भक्ति का माहौल है श्री चंद्रकला सीताराम विवाह मंडली जिसके व्यास श्री जनक जयाशरण जी है ,के नेतृत्व में यहां दिनभर भजन कीर्तन ,आराधना और पूजा पाठ जारी है । मंदिर के नवनिर्मित हाल के बीचों-बीच शक्ति दुर्गा मां की स्थापित मूर्ति विशेष आकर्षण का केंद्र है ।मंदिर परिसर में ही स्थापित विशेष शिवलिंग ,काली मां की मूर्ति एवं अन्य देवी देवताओं की मूर्ति मंदिर को काफी सुशोभित कर रही है तथा भक्ति का माहौल बना रही है।गौरतलब है कि लगभग 50 वर्ष पूर्व जब चंचल बाबा यहां आए तो यह जगह विरान था तथा पशु पक्षी सांप बिच्छुओं का अड्डा था। लावारिस लास भी यहा फेके जाते थे, लेकिन उन्होंने जमीन को खरीदा और जन सहयोग से यहां छोटा मंदिर बनवाया। देखते-देखते आज वह मंदिर विशाल रूप ले चुका है तथा मंदिर की ख्याति पूरे देश में हो चुकी है ।आश्रम का सबसे अनोखा सेवा चमत्कारी भस्म है जिसे प्रतिदिन स्वयं चंचल बाबा हवन कुंड में मंत्र उच्चारण के साथ जड़ी बूटियां को स्वाहा कर बनाते है।वे उस भस्म मे विशेष शक्ति समाहित करते हैं ।उस भस्म को पुड़िया में बनाकर वे अपने व्यास गद्दी से जरूरतमंदों के बीच वितरित करते हैं ।आधुनिक विज्ञान के युग में यह चमत्कारी भस्म अपने आप में एक जादुई करिश्मा कर रहा है। आयुर्वेद के सिद्धांत मंत्र शोधन विधि के द्वारा स्वयं चंचल बाबा इसे तैयार करते हैं और शरीर में अंदर किसी प्रकार के एलर्जी को देखते-देखते यह भस्म समाप्त कर देता है ।इस भस्म की ख्याति इतनी हो गई है कि विदेशों में भी इसे भेजना पड़ रहा है और वहा इसका लाभ लोग उठ रहे है। मंदिर परिसर के बाहर सामियाना गिराया जा रहा है ,भव्य पंडाल सज रहा है तथा इसके भंडारा में लंगर आरंभ हो चुका है ।लंगर में विभिन्न क्षेत्रों से साधु संत महात्मा भोजन कर रहे हैं। गुरु पूर्णिमा के बारे में चंचल बाबा ने बताया कि वास्तव में यह गुरु का पर्व नहीं है बल्कि शिष्यो का पर्व है ।गुरु अपने शिष्यों के अंदर तमाम शक्ति भर देना चाहता है और अपने से भी आगे बढ़ाने का प्रयास करता है ।शिष्य हैं तभी तो गुरु हैं। उन्होंने गुरु पूर्णिमा को भारत का प्राचीन परचलन कहा।कहा कि कोई भी गुरु के माध्यम से भगवान तक पहुंच सकता है।अगर अच्छा गुरु रहे तो शिष्य बहुत ही अच्छा कर पाते हैं ।यह पीठ लगभग 50 वर्षों से आध्यात्मिक सेवा के लिए समर्पित है तथा मैं अपने गुरु के आदेश के अनुसार यहां अपनी सेवा दे रहा हूं।
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