सीता और रामकली की पुकार पर करीब दो सौ ईंट भट्ठा के मजदूरों ने खाई सर्वजन की दवा

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  • एएनएम स्कूल की करीब 150 छात्राओं ने भी खाई दवा 
  • चिमनी मालिकों ने भी मजदूरों के साथ खाई सर्वजन की दवा 
मुजफ्फरपुर। छह साल से हमारी चिमनी चल रही है। यह पहली बार है जब हम फाइलेरिया की दवा खा रहे हैं। हमें क्यों गुरेज हो कि हम और हमारे मजदूर दवा न खाएं। सीता और रामकली देवी की आपबीती किसे नहीं पिघला देगी। ये बातें वासुदेव छपरा, मीनापुर स्थित एक ईंट भट्ठा संचालक सोनू कुमार व सुरेंद्र प्रसाद ने गुरुवार को कही। जब स्थानीय आशा के साथ जमुना पेशेंट सपोर्ट ग्रुप की सीता और रामकली देवी ने फाइलेरिया के अपने दर्द को ईंट भट्ठे के मालिक और मजदूरों के सामने कही तो भट्ठे के मालिक सहित करीब दो सौ मजदूरों ने फाइलेरिया रोधी दवाइयों का सेवन किया। वहीं झारखंड से मीनापुर आकर मजदूरी का काम कर रहे काली मरांडी ने बताया कि हम यहां पांच साल से काम के लिए आ रहे हैं, आज तक न हमें इस बीमारी के बारे में इतनी जानकारी थी और न किसी ने दवा खिलाई। वासुदेव छपरा के करीब चार ईंट भट्ठों पर फाइलेरिया मरीजों की सहायता से दवा खिलाई गयी। दवा खाने वालों में झारखंड से आए मजूदरों के 50 घर के 150 परिवार तथा 50 से ज्यादा स्थानीय मजदूर भी शामिल थे।
भ्रम को करना होगा दूर:
चिमनी के मालिक सोनू कुमार ने कहा कि यह भ्रांति है कि ईंट भट्ठे पर मालिक मजदूरों से मिलने नहीं देते। सरकार अगर दूर-दराज के इलाकों में रहने या काम करने वालों के स्वास्थ्य का ख्याल रख रही है या उन्हें किसी तरह की सुविधा मुहैया करा रही है तो इससे उन्हें कोई दिक्कत नहीं है।
एएनएम छात्राओं ने स्वयं खायी दवा:
जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार ने बताया कि कुछ दिन पहले एएनएम स्कूल की करीब 150 छात्राओं को सर्वजन दवा अभियान के तहत दवा खिलाने का प्रशिक्षण दिया गया था। छात्राओं ने स्वयं रुचि दिखाते हुए स्वयं के अनुसार दवा का सेवन किया। गुरुवार को करीब 150 छात्राओं ने फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन किया। मौके पर जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार तथा पीसीआई के अमित कुमार मौजूद थे।
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