जिले से 13 बच्चे कॉक्लियर इम्प्लांट के लिए जाएंगे कानपुर- डॉ मनीष कुमार

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  •  मूक- बधिर बच्चों की पहचान को सदर अस्पताल में हुई  स्क्रीनिंग 
  • रक्सौल से 4, ढाका से 3, मोतिहारी अनुमंडल से 6 मूक-बधिर बच्चे का होगा इलाज 
मोतिहारी : जिले के 13 मूक-बधिर बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट होगा। इन बच्चों को आवाज सुनने एवं बोलने में काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे बच्चे अपने अभिभावक के साथ कॉक्लियर इम्प्लांट के लिए स्वर्गीय डॉ एसएन मेहरोत्रा मेमोरियल ईएनटी फाउंडेशन कानपुर जाकर अपना सफल इलाज कराएंगे। ये बातें आरबीएसके जिला समन्वयक डॉ मनीष कुमार ने कही। उन्होंने बताया कि आरबीएसके योजना अन्तर्गत बच्चों में होने वाली 43 तरह की बीमारियों का पता आंगनबाड़ी केन्द्रों व सरकारी विद्यालयों पर लगाया जाता है। इस दौरान आरबीएसके चिकित्सकों द्वारा शारीरिक एवं मानसिक जांच की जाती है। इस दौरान कई प्रकार की गंभीर बीमारियों की स्क्रीनिंग द्वारा पता लगाया जाता है। वहीं कुछ ठीक होने वाली बीमारियों के लिए बच्चों को आईजीआईएमएस पटना रेफर किया जाता है। वहीं हृदय में छेद जैसे गंभीर रोग से ग्रसित बच्चों को शल्य क्रिया हेतु सत्य साई हॉस्पिटल अहमदाबाद भेजा जाता है। डॉ मनीष कुमार ने बताया कि बीमारियां ज्ञात होने के बाद आने-जाने के खर्चे से लेकर इलाज तक की सारी व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क की जाती है। इसमें किसी भी प्रकार का शुल्क अभिभावकों द्वारा नहीं दिया जाता है।
डॉ मनीष कुमार ने बताया कि मूक- बधिर बच्चों की पहचान को सोमवार को सदर अस्पताल के आरबीएसके क्लिनिक में बच्चों की स्क्रीनिंग की गईं। जिनमें 6 बच्चे का चयन कॉक्लियर इम्प्लांट हेतु किया गया है। उन्होंने बताया कि रक्सौल से 4, ढाका से 3, मोतिहारी अनुमंडल से 6 मूक- बधिर बच्चे का कॉक्लियर इम्प्लांट कर मुफ्त इलाज होगा।
बहरेपन की समस्या से बच्चों को बचाने के लिए समय रहते इलाज जरूरी: 
सिविल सर्जन डॉ अंजनी कुमार ने बताया कि बहरेपन की समस्या से बच्चों को बचाने के लिए समय रहते इलाज बहुत जरूरी है। इसके लिए माता-पिता दोनों को ध्यान देने की जरूरत है। बहुत सारे बच्चों में  जन्मजात बहरेपन और नहीं बोल पाने की जानकारी माता पिता को होती है। इसके बावजूद भी वो बच्चों के बड़ा होने का इंतजार करने लगते हैं। यहीं लापरवाही आगे चलकर गंभीर हो जाती व ठीक भी नहीं हो पाती हैं। बिहार सरकार मूक- बधिर बच्चों के लिए कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी योजना चला रही है। जिसके जरिए अब 5 वर्ष तक के बच्चों की निःशुल्क सर्जरी कराने की व्यवस्था की गई है।
कब की जाती है कॉक्लियर इंप्लाट सर्जरी: 
कॉक्लियर इंप्लाट सर्जरी- बच्चों में जन्मजात बोलने और सुनने में होने वाली  समस्या को दूर करने के लिए कॉक्लियर इंप्लाट सर्जरी की जाती है। बहुत सारे बच्चे छह महीने के बाद भी नहीं बोल और सुन पाते हैं। इसके निदान के लिए सर्जरी को चुना जा सकता है। कॉक्लियर इंप्लाट सर्जरी में एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का उपयोग किया जाता है। उसे अंदर और बाहर फिट करने के लिए सर्जरी की जाती है। सर्जरी के दौरान 4-5 घंटे का समय लगता है। मरीज को बेहोश कर सर्जरी होती है। इससे बच्चों में सुनने की क्षमता विकसित होती है। गूंगे और बहरे बच्चों के लिए सर्जरी किसी वरदान से कम नहीं है।
मौके पर आरबीएसके जिला समन्वयक डॉ मनीष कुमार, मेहरोत्रा फाउंडेशन के सचिन कुमार मिश्रा, ऑडियोलॉजिस्ट महेंद्र कुमार, नौशाद अहमद, प्रमोद कुमार, रोहित राज व अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे।
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