- बिहार की समृद्ध संगीत विरासत से अंतरराष्ट्रीय मंचों तक, तीन दशकों से अधिक समय से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रचार-प्रसार में समर्पित हैं वायलिन वादक एवं संगीतकार डॉ. रंजन कुमार।
बिहार के प्रतिष्ठित हिंदुस्तानी शास्त्रीय वायलिन वादक एवं संगीतकार डॉ. रंजन कुमार तीन दशकों से अधिक समय से भारतीय शास्त्रीय संगीत की साधना और प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहे हैं। पश्चिम चंपारण के बेतिया में जन्मे तथा पूर्वी चंपारण के तालवा पोखर गांव के मूल निवासी डॉ. कुमार ने देश-विदेश के विभिन्न मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों से विशिष्ट पहचान बनाई है।
वे आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के ग्रेडेड कलाकार तथा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद संबद्ध (ICCR) एवं संगीत नाटक अकादमी के सूचीबद्ध उच्चश्रेणी के कलाकार हैं। भारत के विभिन्न हिस्सों के अलावा इंग्लैंड, फ्रांस, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, नेपाल और लक्जमबर्ग में भी सांगीतिक यात्राएं की हैं।
प्रख्यात गुरुओं से प्राप्त किया संगीत मार्गदर्शन
डॉ. कुमार की संगीत साधना को प्रख्यात गुरु पंडित टी. एम. पटनायक, पद्म भूषण डॉ. एम. एस. गोपालकृष्णन तथा विद्वान डॉ. श्रीराम परसुराम का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। उनकी वादन शैली में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की बारीकियों के साथ गायकी अंग की विशेषताएं दिखाई देती हैं। इस शैली में वायलिन के माध्यम से गायन की सूक्ष्मताओं, भावों और स्वर-विस्तार को अभिव्यक्त किया जाता है।
प्रधानमंत्री की मेजबानी में आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति
डॉ. कुमार के संगीत जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव वर्ष 2019 में आया, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जाम्बिया के तत्कालीन राष्ट्रपति एडगर सी. लुंगु के सम्मान में आयोजित विशेष संगीत कार्यक्रम में वायलिन वादन किया। प्रस्तुति के उपरांत प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लुंगु ने आगे आकर उन्हें सम्मानित किया।
पुनः जनवरी 2026 में उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ की उच्चस्तरीय सहभागिता के दौरान सांस्कृतिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा तथा यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी उपस्थित थे। इन अवसरों पर उनकी सहभागिता ने अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंचों पर भारतीय शास्त्रीय संगीत की उपस्थिति को रेखांकित किया।
’संवाद’ परियोजना के लिए मिला संस्कृति मंत्रालय का अनुदान
डॉ. रंजन कुमार को वर्ष 2011 से 2013 के दौरान भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से उनकी संगीत परियोजना ‘संवाद’ (Samvaad) के लिए प्रोडक्शन ग्रांट प्राप्त हुआ। इस परियोजना के माध्यम से विभिन्न भारतीय शास्त्रीय वाद्ययंत्रों के बीच संगीतात्मक संवाद और पारस्परिक अभिव्यक्ति की संभावनाओं को प्रस्तुत किया गया।
वर्ष 2003 में बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा कार्य विभाग ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ कलाकार के रूप में सम्मानित किया। उन्हें ‘विदुषी महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान’ (2022) और ‘इंटरनेशनल जे. पी. अवॉर्ड’ (2025) सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। उनके अन्य सम्मानों में ‘वायलिन के पर्याय’, ‘संगीत कला रत्न’, ‘कला प्रतिभा सम्मान’ और ‘राष्ट्रीय कला सम्मान’ शामिल हैं।
संगीत जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों ने किया सम्मानित
प्रख्यात गजल गायक उस्ताद गुलाम अली ने डॉ. कुमार को सम्मानित किया है। संगीतविद् पद्मश्री गजेन्द्र नारायण सिंह की पुस्तकों ‘सुरीले लोगों की संगत’ और ‘संगीत परंपरा’ में भी डॉ. कुमार की संगीत प्रस्तुतियों एवं व्यावसायिक गतिविधियों से संबंधित उल्लेख होने की जानकारी उनके परिचय में दी गई है।
तीन दशकों से अधिक की संगीत साधना, प्रतिष्ठित गुरुओं से प्राप्त प्रशिक्षण और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय सहभागिता के माध्यम से डॉ. रंजन कुमार भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहे हैं। उनकी यात्रा बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भारतीय शास्त्रीय संगीत की वैश्विक उपस्थिति के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखी जा सकती है।
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