पड़ोसी देश नेपाल के राजनीतिक गलियारों में इस समय एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसने वहां की मुख्य विपक्षी और ऐतिहासिक पार्टी ‘नेपाली कांग्रेस’ के भीतर नई हलचल पैदा कर दी है। नेपाल के एकमात्र डॉलर अरबपति और देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों में शुमार किए जाने वाले बिनोद चौधरी को नेपाली कांग्रेस का नया उपाध्यक्ष चुन लिया गया है। पार्टी के महाधिवेशन और आंतरिक चुनावों के दौरान समावेशी कोटे के तहत शानदार जीत हासिल करते हुए उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।
खास बात यह है कि इस पद के लिए हुए कड़े मुकाबले में उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ते हुए भारी संख्या में वोट अपने नाम किए। नेपाल के बिजनेस जगत में ‘अंबानी’ के नाम से मशहूर बिनोद चौधरी की मुख्य राजनीतिक धारा वाली पार्टी में इस शीर्ष पद पर ताजपोशी इस बात का साफ संकेत देती है कि आने वाले दिनों में नेपाल के आर्थिक और राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ने वाले हैं।
फोर्ब्स सूची में शामिल नेपाल के इकलौते अरबपति की कुल संपत्ति और साम्राज्य
बिनोद चौधरी का नाम दुनिया भर के प्रतिष्ठित बिजनेस मैग्जीन ‘फोर्ब्स’ की अरबपतियों की सूची में शामिल है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, बिनोद चौधरी की कुल संपत्ति (Net Worth) लगभग 2.1 अरब डॉलर (यानी भारतीय मुद्रा में 17,500 करोड़ रुपये से अधिक) आंकी गई है। उनका कारोबार सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत, मध्य पूर्व, यूरोप और कई अन्य देशों तक फैला हुआ है।
वे सीजी कॉर्प ग्लोबल (CG Corp Global) समूह के चेयरमैन और अध्यक्ष हैं। उनके इस विशाल व्यावसायिक साम्राज्य में इंस्टेंट नूडल्स ब्रांड ‘वाई-वाई’ (Wai Wai) की देश-दुनिया में धूम है, इसके अलावा सीमेंट, होटल इंडस्ट्री (जिसमें भारत की प्रसिद्ध ताज होटल श्रृंखला के साथ साझेदारी भी शामिल है), बैंकिंग सेक्टर और रियल एस्टेट जैसे कई बड़े और मुनाफे वाले बिजनेस शामिल हैं। नेपाल के आधुनिक औद्योगिक विकास में उनके परिवार का योगदान पिछले करीब 140 वर्षों से लगातार बना हुआ है।
कम्युनिस्ट राजनीति से शुरुआत कर लोकतांत्रिक पार्टी के शिखर तक का सफर
बिनोद चौधरी का राजनीतिक जीवन भी बेहद दिलचस्प और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन के दिनों में वे कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़े हुए थे और वामपंथी राजनीति में सक्रिय रहे थे। अपने शुरुआती दौर में वे नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के टिकट पर संविधान सभा के सदस्य भी चुने गए थे।
हालांकि, समय के साथ बदलते राजनीतिक परिवेश को भांपते हुए उन्होंने साल 2017 में नेपाली कांग्रेस का दामन थाम लिया था। पार्टी में शामिल होने के बाद से ही उन्होंने संगठन के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी थी। पिछले कुछ सालों में वे पार्टी के केंद्रीय समिति के सदस्य बनने से लेकर संसद तक का सफर तय कर चुके हैं। अब उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर चुने जाने के बाद वे पार्टी के भीतर आर्थिक सुधारों और नीतिगत फैसलों का एक बहुत बड़ा चेहरा बन गए हैं।
नेपाल के आर्थिक और राजनीतिक भविष्य पर बिनोद चौधरी के उपाध्यक्ष बनने का असर
एक तरफ जहां नेपाल की अर्थव्यवस्था इस समय कई तरह की अंदरूनी चुनौतियों और वित्तीय दबावों से जूझ रही है, वहीं देश के सबसे सफल कारोबारी का मुख्य राजनीतिक दल के शीर्ष पद पर बैठना अपने आप में एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि बिनोद चौधरी के पास देश की वित्तीय दशा सुधारने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश आकर्षित करने का एक सुनहरा अवसर है।
नेपाली कांग्रेस पार्टी को उम्मीद है कि उनके कॉर्पोरेट तजुर्बे और वैश्विक संपर्कों का फायदा पार्टी को आगामी चुनावों और जनता के बीच अपनी आर्थिक पकड़ मजबूत करने में मिलेगा। एक सफल उद्योगपति से लेकर देश की मुख्य धारा की राजनीति के दूसरे सबसे बड़े पद तक का उनका यह सफर नेपाल के आधुनिक राजनीतिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
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