- लैब टेक्नीशियनों को दिया गया तकनीकी प्रशिक्षण, बताए गए ब्लड स्मीयर व माइक्रोस्कोपिक जांच के गुर
- 28 सितंबर से शुरू होगा प्री-टास अभियान, 15 प्रखंडों में रात 10 बजे के बाद लिया जाएगा रक्त का नमूना
- प्रत्येक तीन साइट से एकत्र किए जाएंगे कुल 900 सैंपल
हाजीपुर। सदर अस्पताल परिसर स्थित सभागार में बुधवार को नाइट ब्लड सर्वे (एनबीएस) के तहत प्री-टास के सफल संचालन को लेकर लैब टेक्नीशियनों (एलटी) के लिए एक दिवसीय तकनीकी कार्यशाला सह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। आगामी 28 सितंबर से जिले में प्री-टास अभियान की शुरुआत होने जा रही है। कार्यशाला में चेहराकलां के एलटी अजीत कुमार ने मास्टर ट्रेनर के रूप में तकनीकी सत्र का संचालन किया।
ओवल शेप में बनेगी स्मीयर, सीधे धूप में स्लाइड सुखाने पर रोक:
तकनीकी सत्र के दौरान मास्टर ट्रेनर अजीत कुमार ने फाइलेरिया परजीवी (माइक्रोफाइलेरिया) की पहचान और सटीक जांच प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि माइक्रोफाइलेरिया रात में ही परिधीय रक्त संचार (पेरीफेरल ब्लड सर्कुलेशन) में सक्रिय होते हैं, इसलिए रक्त संग्रहण का समय रात 10 बजे से देर रात तक तय किया गया है। कर्मियों को एसेप्टिक तकनीक के साथ फिंगर प्रिक करने और 60 माइक्रोलीटर रक्त की तीन समान बूंदों से थिक ब्लड स्मीयर तैयार करने का तरीका बताया गया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि स्लाइड पर ब्लड फिल्म को ओवल (अंडाकार) शेप में ही बनाएं और उसी अनुपात में स्टेनिंग करें। मास्टर ट्रेनर ने सख्त हिदायत दी कि तैयार की गई स्लाइड को कभी भी सीधे धूप में न सुखाएं, बल्कि कमरे के तापमान पर छाया में ही एयर ड्राई करें; क्योंकि सीधी धूप से रक्त कणिकाएं और परजीवी नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही डी-हीमोग्लोबिनॉलाइजेशन और माइक्रोस्कोप में 100 एक्स ऑयल इमर्शन लेंस से शीथेड माइक्रोफाइलेरिया की पहचान की बारीकियां समझाई गईं।
28 सितंबर से 15 प्रखंडों में शुरू होगा सर्वे, रात 10 बजे के बाद ही सैंपल कलेक्शन: डॉ. गुड़िया
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी (डीवीबीडीसीओ) डॉ. गुड़िया ने बताया कि 28 सितंबर से चेहराकलां और महुआ को छोड़कर जिले के शेष सभी 15 प्रखंडों में यह प्री-टास अभियान विधिवत शुरू किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी हाल में सैंपल कलेक्शन रात 10 बजे से पहले शुरू नहीं होगा। सर्वे में केवल 20 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों का ही रक्त नमूना लिया जाएगा।
रणनीति के तहत प्रतिदिन प्रति टीम कम से कम 75 सैंपल लेगी, जबकि प्रत्येक 3 चिन्हित साइटों से कुल 900 सैंपल संग्रहित करने का लक्ष्य है। बैठक में डब्ल्यूएचओ से डॉ. माधुरी देवराजू, वीबीडीसी राजीव कुमार, अनिकेत कुमार, अमित कुमार एवं पीरामल स्वास्थ्य से पीयूष कुमार सहित सभी एलटी उपस्थित रहे।
पीएचसी से लंबित मानदेय भुगतान न होने पर एलटी ने जताई नाराजगी:
प्रशिक्षण सत्र के दौरान उपस्थित लैब टेक्नीशियनों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) से पूर्व के कार्यों का बकाया भुगतान नहीं मिलने का गंभीर मुद्दा उठाया। एलटी ने कहा कि पूर्व में चलाए गए स्वास्थ्य अभियानों और रात्रि रक्त सर्वेक्षण की प्रोत्साहन राशि व मानदेय का भुगतान पीएचसी स्तर पर महीनों से लंबित पड़ा है। कर्मियों ने मांग रखी कि 28 सितंबर से शुरू होने वाले नए प्री-टास्क अभियान से पहले पिछले सभी बकायों का अविलंब भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
मामले को संज्ञान में लेते हुए जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी (डीएमओ) ने गहरी नाराजगी और खेद प्रकट किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही से राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में रुकावट आती है और जमीनी स्तर पर समर्पित भाव से काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मी भी हतोत्साहित होते हैं। डीएमओ ने सभी पीएचसी प्रभारियों को 7 दिनों के भीतर लैब टेक्नीशियनों के सभी पुराने और लंबित बकायों का शत-प्रतिशत भुगतान करने की ताकीद की, ताकि अभियान बिना किसी बाधा के संचालित हो सके।
50