अयोध्या में नव संवत्सर का शंखनाद 19 मार्च को राम मंदिर आएंगी राष्ट्रपति मुर्मू, यूपी उत्तराखंड के 3000 कारसेवकों को विशेष बुलावा

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राम नगरी अयोध्या में 19 मार्च का दिन बेहद खास होने जा रहा है। हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के पहले दिन राम मंदिर परिसर में एक भव्य समारोह आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू न केवल रामलला के दर्शन करेंगी, बल्कि मंदिर के दूसरे तल पर ‘श्रीराम यंत्र’ और ‘श्रीराम नाम मंदिर’ की स्थापना भी करेंगी।

खास मेहमान: कारसेवकों का होगा सम्मान

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस कार्यक्रम के लिए एक विशेष अतिथि सूची तैयार की है:

3000 कारसेवक: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के करीब 3000 ऐसे कारसेवकों और आंदोलन से जुड़े लोगों को आमंत्रित किया गया है, जो किसी कारणवश 22 जनवरी के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल नहीं हो पाए थे।

श्रमिकों का सम्मान: राष्ट्रपति मुर्मू मंदिर निर्माण में दिन-रात योगदान देने वाले लगभग 400 श्रमिकों को अपने हाथों से सम्मानित करेंगी।

विशिष्ट अतिथि: कार्यक्रम में केरल की आध्यात्मिक गुरु माँ अमृतामयी, कर्नाटक के धर्माधिकारी वीरेंद्र हेगड़े और आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले भी शिरकत करेंगे।

कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल

विवरण जानकारी
तारीख 19 मार्च 2026 (नव संवत्सर/नवरात्रि प्रथम दिन)
समय सुबह 09:00 बजे से अनुष्ठान शुरू (राष्ट्रपति करीब 4 घंटे रहेंगी)
अनुष्ठान काशी के आचार्य पंडित गणेश्वर शास्त्री के नेतृत्व में 51 वैदिक आचार्य
मुख्य कार्यक्रम श्रीराम यंत्र स्थापना और ‘श्रीराम नाम मंदिर’ का उद्घाटन

दर्शन नहीं रुकेंगे: भक्तों के लिए बड़ी सुविधा

आमतौर पर वीवीआईपी दौरे के दौरान आम जनता के लिए दर्शन रोक दिए जाते हैं, लेकिन इस बार ट्रस्ट और प्रशासन ने एक नई योजना बनाई है:

सुचारु दर्शन: राष्ट्रपति की मौजूदगी के दौरान भी आम श्रद्धालुओं के लिए रामलला के दर्शन खुले रहेंगे।

अल्प विराम: केवल उन कुछ मिनटों के लिए श्रद्धालुओं को रोका जा सकता है जब राष्ट्रपति सीधे गर्भगृह के सामने होंगी।

सुरक्षा: सुरक्षा एजेंसियों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं ताकि सुरक्षा और भक्ति के बीच संतुलन बना रहे।

400 साल पुरानी रामायण के होंगे दर्शन

इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू उस 400 साल पुरानी वाल्मीकि रामायण के भी दर्शन करेंगी, जिसे हाल ही में दिल्ली के केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा ट्रस्ट को भेंट किया गया है। इसे मंदिर के गर्भगृह के पास स्थापित किया गया है।

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