राजा का धर्म प्रजा की रक्षा और न्याय की स्थापना करना है।” – राजेंद्र प्रसाद अधिवक्ता

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 चंद्रवंशी समाज द्वारा मगध सम्राट जरासंध  के जयंती समारोह मनाया गया 
गया जी।देव राम चंद्रवंशी पंचायत न्यास भवन गेवाल बिगहा समीर तकिया में मगध सम्राट जरासंध जी के जयंती के अवसर पर उनके प्रतिमा पर माला पुष्प पूजा पाठ एवं हबन कर नमन किया गया एवं प्रसाद एवं भंडारा का आयोजन किया गया इस अवसर पर समाज के कई लोगों उपस्थित होकर  जरासंध जी को नमन कर अपना अपना विचार रखा मगध के परम प्रतापी सम्राट महाराज जरासंध जी भारतीय इतिहास के उनमहानयोद्धाओं में से एक थे, जिन्होंने अपने अद्वितीय शौर्य, पराक्रम और नीति से संपूर्ण आर्यावर्त को एकता के सूत्र में बांधने का प्रयास किया। उनका जन्म मगध की पवित्र भूमि राजगृह  बिहार में हुआ था। वह राजा बृहद्रथ के पुत्र थे, जिन्हें एक विशेष प्रसंग में जरा नाम थी इसलिए उनका नाम”जरासंध” पड़ा।इस अबसर पर न्यास के उपाध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद अधिवक्ता ने कहा महाराज जरासंध न केवल एक वीर योद्धा थे, बल्कि एक उत्तम प्रशासक और धर्मनिष्ठ राजा भी थे। उन्होंने मगध को उस युग में राजनीति, अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति का केंद्र बनाया है। उनके शासनकाल में मगध की सीमाएँ अत्यंत विस्तृत थीं और उनकी सेना अत्यंत संगठित एवं पराक्रमी थी। उन्होंने अनेक राज्यों को अपने अधीन कर भारत को एक संगठित साम्राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर किया।जरासंध जी का उपदेश था कि “राजा का धर्म प्रजा की रक्षा और न्याय की स्थापना करना है।” वे सदैव धर्म, नीति और साहस के मार्ग पर चले। उन्होंने यह संदेश दिया कि एक शासक को व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में निर्णय लेना चाहिए।मगध की महिमा आज भी उनके नाम से जुड़ी है। राजगृह की धरती उनके पराक्रम की गाथा गाती है। भले ही उनका अंत भगवान श्रीकृष्ण के साथ संघर्ष में हुआ, लेकिन उनकी वीरता, नीतिपूर्ण शासन और देश की एकता के लिए उनका योगदान अमर है।महाराज जरासंध जी के  जयंती  पर हम सबको उनके उपदेशों से प्रेरणा लेनी चाहिए और समाज में एकता, धर्म और न्याय की भावना को सुदृढ़ करने का संकल्प लेना चाहिए। महाराज जरासंध केवल एक पराक्रमी राजा ही नहीं थे,कहा कि जब तक समाज शिक्षा से सशक्त नहीं होगा, तब तक उसका सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। इसइस अवसर पर पूर्व नगर आयुक्त विजय कुमारने आह्वान किया कि चंद्रवंशी क्षत्रिय समाज आने वाले दिनों में संगठित रहे, एकजुट होकर अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा करे। जरासंध जी ने मगध साम्राज्य को संगठित कर भारत में एकता का संदेश दिया था, उसी आदर्श को आज के समय में अपनाने की आवश्यकता है। समाज का उत्थान तभी संभव है जब हम आपसी मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे के सहयोग से आगे बढ़ें। जरासंध जी की जयंती हम सबको यह प्रेरणा देती है कि धर्म, साहस और एकता के मार्ग पर चलकर समाज और राष्ट्र का कल्याण करें। आज के पूजा समारोह में राकेश कुमार उर्फ मंटू कुमार  वरिष्ठ कांग्रेस नेता अमित चंद्रवंशी  वार्ड पार्षद उपेंद्र कुमार सिं,ह पूर्व वार्ड पार्षद राकेश कुमार वार्ड पार्षद  दीपक कुमार चंद्रवंशी विजय कुमार सिन्हा, धीरेन्द्र कुमार खरखुरा,सिद्धार्थ कुमार डब्लू कुमार अरुण चंद्रवंशी विकास कुमार  मुरारी कुमार चंद्रवंशी विकास कुमार चंद्रवंशी जितेंद्र चंद्रवंशी राहुल चंद्रवंशी महेंद्र सिंह चंद्रवंशी बिहारी चंद्रवंशी सचिन चंद्रवंशी बुद्धदेव चंद्रवंशी भारत चंद्रवंशी मुकेश चंद्रवंशी संजू चंद्रवंशी सरोज चंद्रवंशी गोपाल प्रसाद चंद्रवंशी मुन्ना चंद्रवंशी अजय चंद्रवंशी ललित चंद्रवंशी पवन चंद्रवंशी बल्लू चंद्रवंशी छोटू चंद्रवंशी सहित भारी संख्या में लोगों ने शामिल हुए पूजा में शामिल श्रद्धालुओं को न्यास के कोषाध्यक्ष राकेश कुमार उर्फ मंटू कुमारके द्वारा स्वागत किया गया है।
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