परिवर्तन का दृश्य अब स्पष्ट दिख रहा है-बीके शशि भाई 

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अशोक वर्मा
मोतिहारी : चंपारण जिला नेपाल से सटा  होने के कारण  काफी महत्वपूर्ण है ।सिकरहना नदी एवं  हिमालय पहाड़ से सटे होने के कारण चंपारण का आबो हवा हमेशा ही संतुलित रहा है ।चंपारण में ही जंगल एवं टाइगर प्रोजेक्ट का बहुत बड़ा भूभाग है यहां तक कि नेपाल से निकलने वाली नदियां प्रतिवर्ष भारतीय  क्षेत्र में नुकसान तो करती  है लेकिन  जड़ी बूटी एव खाद मिश्रित जल का पटवन भी कर जाती है जिससे कई फसलों को फायदा  होता है।
 जिले मे 5 वर्षों से प्रकृति अपना तांडव रूप दिखाना आरंभ कर दी है जिसका बड़ा रूप कोरोना काल में भी लोगों ने देखा है ।इस वर्ष बेतहाशा गर्मी है चंपारण में 43 डिग्री तक तापमान पहुंच गया है। आम आदमी के साथ पशु पक्षी भी तड़प रहे हैं ,जल की भीषण समस्या उत्पन्न हो गई है जिले के आधे भाग में कम लेयर के चापाकल सूख चुके हैं ।बोरिंग वाले अपने मोटर को बदल शक्तिशाली  मोटर लगा रहे हैं। विहार सरकार ने पोखरा,कुआ,पईन,चवर मे जल भंडारण करने की घोषणा की थी जो हवा हवाई हो गया।गनिमत है कि बिजली आपूर्ति जारी है। किसान परेशान है खेत में नमी न होने से तथा बरसात नहीं होने से धान के बिचड़े भी नहीं गिर पा रहे हैं।  किसान आकाश की ओर देखकर अब थक हार गए हैं ।जिले में  असमय मौत का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। कई नौजवान लू के शिकार होकर शरीर  छोड चुके है। हृदय  रोगी कमरे में बंद है लेकिन हर पल  सशंकित है  कि  कब क्या हो जाए।
नाराज प्रकृति के बारे में जिले के कई आध्यात्मिक क्षेत्र के लोगों से बातचीत की गई और सभी ने इसे मनुष्य के कर्मों की सजा कहा।
लगभग तीन दशक से ब्रह्मकुमारी के ईश्वरीय ज्ञान से जुड़े हुए मुंबई के प्रसिद्ध उद्योगपति बीके शशि भाई ने इस संदर्भ में बताया कि ब्रह्माकुमारी संस्था में 1936 में बाबा को विनाश का साक्षात्कार हुआ था तथा 100 वर्षों का पुरुषोत्तम संगम युग का आरंभ हुआ था। बाबा ने उस समय ही बताया था कि परिवर्तन होगा संपूर्ण विनाश कभी होता है। चक्र प्रत्येक 5000 वर्ष पर घूम जाता है। उन्होंने बताया कि कोरोना का जो  झटका दुनिया वालों को लगा वह परिवर्तन का आरंभ था।कोरोना के प्रहार से लोगों ने  बहुत सीख नहीं ली। परमात्मा का कार्य अपने नियम अनुसार समय पर आरंभ हो चुका है। जैसे-जैसे पुरुषोत्तम संगम युग समापन की ओर जा रहा है वैसे-वैसे प्राकृतिक प्रकोप भी तेजी से बढ़ना आरंभ हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी कुछ ड्रामा अनुसार हो रहा है । प्राकृतिक प्रकोप और योग का  अपना  संबंध है। जैसे-जैसे योग की शक्ति प्रज्वलित होगी  वैसे-वैसे परिवर्तन की गति भी तेज होगी। दुनिया वाले इन बातों को अभी नहीं समझ पा रहे हैं लेकिन चंद वर्षों के अंदर समझेंगे और तेजी से परमात्मा को ढूंढेगे । उन्होंने यह भी कहा कि पूजा पाठ तो बढे हैं लेकिन परमात्मा से संबंध अपेक्षाकृत कम है। जब तक परमात्मा से संबंध नहीं जोड़ा जाएगा तब तक बेहतर परिणाम संभव नहीं है ।उन्होंने परमात्मा से संबंध जोड़ने को इस रूप में कहा कि वे हमारे पिता है और कोई भी पिता अपने बच्चों को दुखी नहीं देखना चाहता। वे अभी धरा पर अवतरित हो चुके हैं ,चूकि वे ज्ञान के सागर हैं इसलिए सुख ,समृद्धि, शांति और प्यार लुटा रहे हैं कोई भी व्यक्ति उनसे संबंध जोड़कर अपनी झोली 21 जनों के लिए भर सकता है। यह तो कुछ नही है आने वाला समय और भी भयानक होने जा रहा है क्योंकि प्रकृति के पाचो  तत्व इकठ्ठे  प्रहार करेगे। दुनिया के  लोगों को इसके लिए तैयार रहना होगा। आर्य समाज के पुरोहित विनोद कुमार ने बताया कि हवन का विशेष महत्व है वर्तमान समय पूजा पाठ  हाईटेक होता जा रहा है  मोबाइल से ही पूजा,अनुष्ठान कराने का सिस्टम तेजी से बढ़ता जा रहा है । भारतीय परंपरा में हवन का विशेष  महत्व है । प्रकृति को शांत करने के लिए  परमात्मा जो बातें बता रहे हैं उसे जीवन में उतरना होगा ।हिंसक तामसिक भोजन छोड़ना होगा इसका भी प्रभाव पर्यावरण पर पड़ रहा है, सिर्फ पेड़ लगाने से नहीं होगा जितनी हत्याएं अभी पशुओं की हो रही है इन सबका भी प्रभाव पर्यावरण पर  पड़ रहा है जिसका परिणाम लोग इस वर्ष की गर्मी में झुलस रहे है। यह गर्मी सीख लेने के लिए है क्योंकि कोरोना से लोगों ने बहुत सीख नहीं ली। इस गर्मी से भी अगर सीख नहीं लेंगे तो फिर विनाश  की तेज गति को झेल नही पायेगे। बचाव का एक मात्र  उपाय अध्यात्म से अपने को जोड़े,कोई भी पाप कर्म  न करे। परमात्मा को एक सुरक्षा कवच के रूप में अपने ऊपर अनुभव करें।
20 वर्षों से ब्रह्मकुमारी के ईश्वरीय ज्ञान में चलने वाली बीके अनिता बहन ने बताया कि भारतीय संस्कृति में योग का अपना विशेष महत्व है परमात्मा  भारत की भूमि पर अवतरित होकर सहज राजयोग का अभ्यास करा रहे हैं। ईश्वरीय  पढ़ाई पढ़ाकर मूल्यो को पुनर्स्थापित कर रहे हैं ।मनुष्य धर्म को तो मान  रहे है रहे हैं ,धार्मिक अनुष्ठान पूजा पाठ भी काफी बढे हैं लेकिन घर्म  धारण करने की चीज होती है। जानलेवा गर्मी का अटैक धरती पर हो चुका है अभी भी समय है परमात्मा से संबंध जोड़े और अपने आप को सुरक्षित करें।
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