अनूप नारायण सिंह
2019 में बिहार से चुनाव जीतने वाले 18 सांसद हो गए भूतपूर्व 12 को नहीं मिल पाया था इस बार सिंबल तो 6 को करना पड़ा हार का सामना, वाम दलों का खुल गया खाता तो पप्पू यादव ने निर्दलीय का खोला खाता। पशुपति पारस उपेंद्र कुशवाहा तथा मुकेश साहनी की पार्टी जीरो पर आउट। चिराग की पार्टी के पहली बार पांच सांसद। 2024 के लोकसभा चुनाव में बिहार के 18 सांसदों को अपना पद छोड़ना पड़ा इनमें से 12 चेहरों को उनकी पार्टियों ने टिकट नहीं दिया था जबकि 6 को हार का सामना करना पड़ा। कटिहार से दुलालचंद गोस्वामी पूर्णिया से संतोष कुशवाहा पाटलिपुत्र से रामकृपाल यादव जहानाबाद से चंदेश्वर सिंह चंद्रवंशी औरंगाबाद से सुशील कुमार सिंह आरा से आरके सिंह को हार का सामना करना पड़ा। पूर्णिया में निर्दलीय पप्पू यादव ने जीत दर्ज की तो काराकाट से निर्दलीय पवन सिंह ने सबको चौक आया पवन के सियासी समीकरण के कारण मध्य बिहार की चार लोकसभा सीट एनडीए के हाथ से फिसल गई। उपेंद्र कुशवाहा साबित हुए पनौती प्रथम चरण में औरंगाबाद में अभय कुशवाहा राजद के उम्मीदवार थे पार्टी लाइन से अलग हटकर तमाम कुशवाह नेता वहां से अभय कुशवाहा को जितवाने में लगे हुए थे इंटरनल खबर थी उपेंद्र कुशवाहा की टीम भी यहां से अभय कुशवाहा को चुनाव जीतने में लगी हुई है इसका असर हुआ कि काराकाट से पवन सिंह निर्दलीय खड़ा हो गए और इस समय क्लियर हो गया कि उपेंद्र कुशवाहा लड़ाई से बाहर है यहां पर कुशवाहा तीसरे नंबर पर चले गए और सवा लाख से ज्यादा मतों से वाम दल के राजा राम सिंह कुशवाहा चुनाव जीत गए असर यही नहीं समाप्त हुआ आर के सांसद आरके सिंह के द्वारा उपेंद्र कुशवाहा के पक्ष में प्रचार किया गया और उपेंद्र कुशवाहा के वाटर आर में पवन सिंह का बदला आरके सिंह से लेने में नहीं चुके इसका सीधा असर सासाराम बक्सर सीट पर भी पड़ा जहां कुशवाहा और राजपूत आमने सामने आ गए हालांकि सिवान में अजय सिंह ने टिकट कटने के बावजूद डैमेज कंट्रोल कर दिया इसी सीट का असर था कि पूर्णिया में राजपूत ने पप्पू यादव का समर्थन किया जहां कहीं भी इस बार कुशवाहा राजपूत आमने-सामने थे वहां वोटो में बिखराव हो गया सम्राट चौधरी विजय सिंह जैसे भाजपा के नेता बिहार के वोटरों का जातिगत वोट भी अपनी पार्टी के लिए नहीं जुटा पाएअगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली छोड़ दें तो अधिकांश एनडीए के नेता इस बार कोई असरदार साबित नहीं हुए सुशील सिंह को जबरदस्ती टिकट दिया गया था जबकि इंटरनल रिपोर्ट थी वहां का पूरा माहौल उनके खिलाफ है बक्सर में मिथिलेश तिवारी और सासाराम में शिवेश राम पर भी दाव लगाना भाजपा के लिए घाटे का सौदा साबित हुआ। जहानाबाद में अरुण कुमार एनडीए के लिए घाटी साबित हुए उनके चुनाव लड़ने के कारण यहां एनडीए बुरी तरह पराजित हुआ। जितन माझी की पार्टी पहली बार लोकसभा में पहुंचने में सफलहुई। तो बिहार में मुकेश साहनी उपेंद्र कुशवाहा और पशुपति पर एस पूरी तरह से सियासत में दरकिनार कर दिए गए। बिहार के सबसे मजबूत नेता के रूप में इस लोकसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार ही सामने आए नीतीश का सोशल इंजीनियरिंग इस व्हाट्सएप पर भारी पड़ा घाटे में राजद भी नहीं रही उसकी सुनने से आंकड़ा बढ़कर चार हो गया कांग्रेस की सीट भी एक से बढ़कर तीन हो गई। बिहार के सियासत में स्वर्ण जातियों को आपस में लगाकर सियासत करने वालों को भी जनता ने मुंहतोड़ जवाब दिया महाराजगंज में भूमिहार यादव बनाम राजपूत खेल रहा तो इसके कारण सारण सीट भी लालू की बिटिया हार गई। आनंद मोहन और पप्पू यादव दोनों के लिए यह चुनाव काफी यादगार रहा आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद शिवहर से चुनाव जीतने में सफल रही तो पप्पू यादव निर्दलीय पुनिया से चुनाव जीत गए। बिहार से सबसे ज्यादा साथ यादव जाति के जबकि 6 राजपूत जाति के सांसद इस बार निर्वाचित हुए। भूमिहार बिरादरी से तीन सांसद जबकि ब्राह्मण कोटे से दो तथा एक कायस्थ निर्वाचित हुए। बिहार से चुनाव हारने वालों में सबसे बड़ा नाम केंद्रीय मंत्री आर के सिंह का रहा तो सबसे चौंकाने वाला चुनाव परिणाम सारण का। आईपीएस की नौकरी छोड़कर बक्सर से चुनाव लड़ने वाले आनंद मिश्रा ने भाजपा को जीती हुई बड़ी हारने पर मजबूर कर दिया पवन सिंह हिना सब आनंद मिश्रा इस बार गेम चेंजर की भूमिका में रहे। चिराग पासवान की पार्टी बिहार और देश में 100% रिजल्ट देने वाली पार्टी रही पांच सीटों पर चुनाव लड़ने वाली लोजपा पांच की पांच सीट जीत गई।
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