- सर्वगुण संपन्नता की प्रतिमूर्ति मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती
- हुकुमी हुकुम चल रहा है और हर घड़ी को अंतिम घड़ी समझो : मम्मा
अशोक वर्मा
मोतिहारी : भारत की भूमि एक बार पुणः स्वर्ग बनने जा रही है ,यह प्रक्रिया प्रत्येक 5000 वर्ष पर होता चला आ रहा है ।गीता ग्रंथ में परमात्मा ने बताया है कि जब-जब धरा पर धर्म की हानि होती है तब -तब मैं भारत की भूमि पर अवतरित होकर धर्म स्थापित करता हूं ।
सिंध प्रांत के अति धर्म परायण व्यक्ति दादा लेखराज हीरा ,सोना और रतन के व्यापारी थे,12 गुरु किए थे ,उनको गीता ग्रंथ से बहुत ही लगाव धा।वे इतने धार्मिक थे कि सर्वशास्त्र शिरोमणि गीता ग्रंथ को छोटे आकार का लॉकेट बनाकर हमेशा गले में लटकाए रहते थे,वे गुरु को भगवान की तरह मानते थे। वे अपने घर पर नियमित सत्संग करते थे ,परिवार और आसपास के लोग सत्संग में बैठते थे,सत्संग मे वे गीता पाठ करते थे ।एक दिन सत्संग के दौरान अचानक असमान्य हो गये,उनके शरीर में अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हुई,बीच सत्संग से उठकर वे अपने कमरे में चले गए। बहुत देर तक जब नहीं लौटे तो परिवार के लोगों ने अंदर कमरे में जाकर देखा ,पूरा कमरा लाल रोशनी से प्रकाशित था।वहां अलौकिकता और दिव्यता थी ।दादा लेखराज के मुख से शिवोह्म शिवोह्म शब्द निकल रहे थे ,आंखों से तेज रोशनी निकल रही थी ।थोड़ी देर के बाद जब उनकी स्थिति सामान्य हुई तो उन्हें जिज्ञासा हुई और अपने परिवार के सदस्यों से पूछा कि वह कौन था क्या हुआ था मुझे? यह प्रक्रिया बाद में अक्सर होने लगी। ब्रह्मा बाबा समझ गए कि मेरे अंदर कोई दिव्य शक्ति आ चुकी है। उन्होंने जिज्ञासा व्यक्त की फिर उन्हें एहसास हुआ कि कोई शक्ति हमसे कुछ कराना चाह रही है। वह शक्ति और कोई नहीं स्वयं शिव बाबा है। शिव बाबा ने दादा लेखराज का नया नामकरण कर ब्रह्म रखा और नई सतयुगी दुनिया निर्माण की जिम्मेवारी उनको दी। आरंभ में तो ब्रह्मा बाबा थोड़ा हैरान और परेशान हुए कि इतना बड़ा काम मै कैसे करूंगा लेकिन फिर परमात्म प्रेरणा और शक्ति से उन्हें ज्ञात हुआ कि करन करावनहार तो कोई और है , मैं तो निमित्त मात्र हूं।फिर उन्होंने अपने बिजनेस को समेटा और अपने विजनेस पार्टनर से जो कुछ भी मिला उसे लेकर बाबा के मिशन को आगे बढ़ाने में जुट गए ।
सत्संग में लोगों का आना अचानक बढ़ने लगा ,जैसे-जैसे लोगों को मालूम हुआ कि दादा लेखराज के तन में परमात्मा की प्रविष्टता हुई है और उनके अंदर श्री कृष्ण की आत्मा है तब काफी लोग आने लगे, साक्षात्कार भी होने लगे। कृष्ण का साक्षात्कार अलग-अलग स्वरूप में होने लगा।धीरे-धीरे उनकी ख्याति होने लगी। एक बार सत्संग के दौरान 16-17 वर्ष की राधे नाम की कन्या की प्रविष्टता हुई। जब राधे की नजर ब्रह्मा बाबा पर पड़ी तब मानो राधे में दिव्य शक्ति की प्रविष्टता हुई ।बाबा ने कहा आओ बच्ची आओ और इस तरह राधे सत्संग में बराबर आने लगी ।सत्संग मे उनके मुख से ओम ध्वनी का उच्चारण बाबा कराते थे। ओम की ध्वनि सुरीली,प्रतीकंपित और मंत्र मुग्ध करने वाली थी।ध्वनी को सुनते ही काफी लोग ट्रांस मे चले जाते थे कई मंत्र मुग्ध हो जाते थे ,उन्हे परमात्म मिलन की अनुभूति होने लगती थी। कितनी माताये , बहने भाई बिल्कुल ही असहज हो जाते थे। बाबा से मिलन मनाने का दृश्य अद्भुत था।
राधे के आने के बाद लोगो को चमत्कारिक अनुभूति दिनों दिन होने लगी।
उसी समय ओम राधे की शादी की बात परिवार वाले चला रहे थे,जब बाबा को इसकी जानकारी हुई तो एक दिन ब्रह्मा बाबा ने राधे से पूछा कि आप पीतांबर धारी के साथ रहोगी या सूट वाले के साथ जाओगी ?उन्होंने राधे को जवाब के लिए 24 घंटे का समय दिया। राधे ने बिना एक पल गवाएं तत्क्षण बाबा को जवाब दिया बाबा मैं कृष्ण की वही राधे हूं, मैं पीतांबर धारी के साथ सेवा करूंगी मैं सुटबूट वाले के साथ नहीं जाउगी। बाबा मुस्कुराए क्योंकि बाबा तो जानी जानकार थे उन्हें पता था कि राधे का क्या जवाब होगा फिर भी राधे के मुख से सुनना चाहते थे। इस तरह से राधे यज्ञ में समर्पित हो गई और अपने विशेष गुण, शक्ति और ईश्वरीय वरदानो के कारण एक वर्ष के अंदर राधे यज्ञ की मां मम्मा बन गई। यज्ञ में समर्पित सैकड़ो भाई-बहन यहां तक कि ब्रह्मा बाबा एवं उनकी युगल यशोदा माता भी राधे को मम्मा कह कर पुकारने लगे।
ड्रामा अनुसार भारत की नारी जो विशेष गुण संपन्न होती है ,मम्मा उसी कि प्रतीक थी ।दुनिया के सामने शिवबाबा ने उनको एग्जांपल के रूप में प्रस्तुत किया। शिव बाबा ने जिस तरह गृहस्ती वाले ब्रह्मा बाबा को आगे करके विश्व के समक्ष उदाहरण दिया कि तुम्हें इनकी तरह बनना है ,उसी तरह विश्व के सभी नारी को भी उन्होंने कुमारी कन्या को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर यह प्रेरणा दी कि तुम्हें मम्मा के समान बनना है ।
भारतीय नारी विशेष गुणो के कारण आज भी देवी स्वरूप में पूजी जाती हैं। नारी के नाम के आगे आज भी देवी शब्द लगता है। यह अनायास नहीं हुआ है ।नारी वास्तव में शिव की शक्ति है और यही कारण है कि आज भी शिवालयों में पूजा पाठ में नारी अधिक देखी जाती है, पूजा उनके जीवन का एक अनिवार्य पार्ट होता है ।
यज्ञ मे समर्पण के साथ मम्मा के शारीरिक बनावट में भी बहुत बड़ा परिवर्तन हुआ । एक कुंवारी कन्या मां के स्वरूप में आ गई ।जिस गुणो के खजाना से भारत की नारी ने पूरे विश्व में प्रकाश फैलाया वह गुण है , ममता, क्षमाशीलता,मधुरता ,निरंहकारिता ,दया ,करुणा ,शीतलता। मम्मा इन तमाम गुणो से संपन्न थी ,उन्होने इन तमाम गुणो को ब्रह्म बच्चों के पालना में लगाया औऱ गुण स्वरूप बनने की प्रेरणा दी।बच्चे उन्हें मां कह कर पुकारते थे ।मम्मा की सबसे बड़ी विशेषता थी कि यज्ञ में कभी भी किसी भी ब्रह्मा वत्स पर गुस्सा नहीं किया। किसी भी बात पर जब भी समझानी देनी होती थी तो मम्मा बड़े प्यार से कहती कि बच्चे ऐसा नहीं करना चाहिए, आप तो होवनहार देवी देवता हो देवी देवता कभी कोई भूल करते हैं क्या ?मम्मा के प्यार दुलार का बच्चों के ऊपर बड़ा ही गहरा असर पडता था। पूरे यज्ञ की पालना मम्मा ने की। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि ब्रह्मा बाबा में उनका पक्का निश्चय धा। यज्ञ में आते ही यह पक्का हो गया कि ब्रह्मा बाबा और शिव बाबा हमेशा साथ रहते हैं। मम्मा ने हमेशा हां जी का पार्ट अदा किया, कभी भी बाबा के किसी भी बात को नकारा नहीं ।कई बहनें और माताये बाबा की बातों को सुनकर अनदेखा करती थी लेकिन मम्मा ने ऐसा कभी नहीं किया। मम्मा ने हमेशा कहा- जी बाबा ,हां जी बाबा। यह उनकी विशेषता थी। मम्मा का मुख्य स्लोगन था “हुकुमी हुकुम चला रहा है” और “हर घड़ी को अंतिम घड़ी समझो “
आज यह संस्था विश्व के 140 देशो में भारत का नया और अद्भुत ज्ञान एक बार पुण: बांट रही है। पवित्रता के फाउंडेशन पर बनी संस्था पूरे विश्व में बट वृक्ष की आकृति ले चुकी है। ड्रामा प्लान अनुसार 2036 युग परिवर्तन का वर्ष है।बाबा ने विभिन्न मुरलियो मे कहा है कि पुरुषोत्तम संगम युग अधिकतम 100 वर्ष का है।यह लीप युग 1936 में आरंभ हुआ जो 2035 में समाप्त हो रहा है ।
दुनिया की वर्तमान स्थिति पर भी अगर हम नजर डालें तो परिवर्तन का दृश्य बिल्कुल स्पष्ट दिखाई दे रहा है ।मधुबन के सभी वरिष्ठ भाई बहनो ने विभिन्न क्लासो में स्पष्ट कर दिया है कि 2025 से2035 तक साक्षात्कार का वर्ष होगा और उसके बाद श्री कृष्ण का जन्म भारत की भूमि पर होगा। यह तमाम बातें बाबा ने किसी न किसी के माध्यम से हम बच्चों को बता दिया है ।
मम्मा बहुत ही कम दिनों तक व्यक्त रूप मे यज्ञ में सेवा दी। 24 जून 1965 मे मम्मा संपूर्णता को प्राप्त कर अगले पार्ट के लिए निकल आज बेहद की सेवा कर रही है। वे जहां भी जिस परिवार में जन्म ली है आज मम्मा के योग तपस्या का ही प्रतिफल है कि यह संस्था विश्व के अंदर एक मिसाल बन चुकी है । इस संस्था की ओर विश्व के बड़े-बड़े संपन्न राष्ट्र आशा भरी नजरों से देख रहे हैं। उनको निश्चय है यह संस्था पूरे विश्व का कायाकल्प करने वाली है, यह सब अनायास ही नहीं हुआ, यह सब ड्रामा प्लान अनुसार हुआ हैऔर हर 5000 वर्ष में एक बार जो चक्र फिरता है वह चक्र फिर रहा है घड़ी की सूई अब बिल्कुल 12 पर आने वाली है। नई दुनिया हमारा बाट जोह रही है । मम्मा की स्मृति दिवस पर ब्रह्मा बच्चों को यह संकल्प लेना चाहिए कि एक भी आत्मा बाबा के परिचय से वंचित न रह जाए वर्ना उलाहना ही सुनना पड़ेगा ।यही लक्ष्य लेकर पुरूषार्थ करना होगा। बाबा ने कहा है कि मुझे जो भी ज्ञान देना है मैं दे चुका हूं अब तुम्ह बच्चे ज्ञान स्वरूप बन संपूर्णता को प्राप्त करना है। बाबा ने बच्चों को बुद्धि का लाइफ क्लीयर रखने रखने को कहा है ताकि बाबा के निर्देश को पकड सके। साक्षात्कार के साथ-साथ विश्व में हलचल तेज होगा साइंस से मिले सुख के संसाधन किसी काम के नहीं रहेंगे ,सभी साधनों का आधार पावर बिजली है और यह साधन बंद हो जाएगी। मम्मा की कही बातें अब शीघ्र सभी के सामने आने वाली है ।आने वाला समय काफी भयानक होने जा रहा है। इस संदेश को हर आत्मा तक पहुंचना है कि भगवान आकर नई दुनिया बना रहे है ।वे वे ज्ञान सागर है सुख, शांति ,समृद्धि एवं प्रेम का खजाना लेकर बांटने के लिए आए है।कोई भी पात्र बन जितना चाहे उनसे ले सकता हैं । वर्तमान समय बाबा वरदानों से सभी को भरपूर कर हैं अभी अवसर है जो जितना लेना चाहे ले ले बिल्कुल मुफ्त मे बंट रहा है।
।मम्मा ने जब शरीर छोड़ा तो बहुत से बच्चों के ऊपर इसका गहरा प्रभाव भी पड़ा था ,लेकिन ड्रामा अनुसार ऐसा होना था और हुआ।
24 जून मम्मा से पावरफुल दृष्टि लेने का दिन है और हम सभी जितना दृष्टि चाहे उनसे ले सकते है।
एम आबजेकट को सामने रख हर घड़ी को अंतिम घड़ी समझ पुरूषार्थ करना है।
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