राज्य द्वारा फ़ाइलेरिया के नेटवर्क सदस्यों का एमडीए अभियान को लेकर किया उन्मुखीकरण   

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  • 7 जिलों के नेटवर्क सदस्यों ने समझा एमडीए अभियान को सफल बनाने के गुर 
  • एमडीए अभियान के दौरान नेटवर्क सदस्यों की भूमिका रहेगी अहम्- डॉ. अनुज रावत 
पटना- आगामी 10 फ़रवरी से राज्य के 24 जिलों में एमडीए अभियान ( सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम ) संचालित किया जायेगा. चयनित 24 जिलों में 7 जिलों में फ़ाइलेरिया नेटवर्क सदस्य अभियान के दौरान सहभागिता करेंगे. इन जिलों में मुजफ्फरपुर, सारण, सिवान, गोपालगंज, गया, कटिहार एवं खगड़िया. सहभागिता के दौरान अधिक से अधिक लोगों को दवा सेवन के लिए प्रेरित करने के अलावा नेटवर्क सदस्य स्वास्थ्य विभाग को हर संभव सहयोग प्रदान करेंगे. फ़ाइलेरिया नेटवर्क फ़ाइलेरिया मरीजों का समूह है जो राज्य के 11 जिलों में फ़ाइलेरिया उन्मूलन अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहा है. एमडीए अभियान के दौरान नेटवर्क के सदस्य समुदाय को जागरूक कर दवा सेवन करने में अहम् भूमिका अदा कर रहे हैं.
समुदाय को जागरूक करने में नेटवर्क सदस्यों की भूमिका प्रशंसनीय:
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डॉ, अनुज रावत, राज्य सलाहकार, फ़ाइलेरिया ने कहा कि समुदाय के बीच जागरूकता की अलख जगाने में नेटवर्क के सदस्य अहम् एवं प्रशंसनीय कार्य कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि नेटवर्क सदस्यों द्वारा हमेशा सटीक सूचना एवं जानकारी ही समुदाय के बीच पहुंचनी चाहिए. एमडीए अभियान के दौरान दवा खाने से मना करने वाले लोगों को नेटवर्क सदस्य अपनी सूझ बूझ एवं जानकारी के बदौलत उन्हें दवा खाने के लिए तैयार कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि फ़ाइलेरिया की दवा अपने सामने खिलानी है और अगर कोई स्वास्थ्यकर्मी दवा बांटते हुए दिखे तो इसकी सूचना नेटवर्क सदस्य अविलंब संबंधित अधिकारी को दें.
सभी जिलों में फ़ाइलेरिया क्लिनिक क्रियाशील:
डॉ. अनुज रावत ने बताया कि राज्य के सभी 38 जिलों में फ़ाइलेरिया क्लिनिक क्रियाशील है और फ़ाइलेरिया मरीज किसी भी तकलीफ में वहां संपर्क कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि इस बार राज्य के 10 जिलों में अभियान के दौरान लोगों को तीन दवाओं, अल्बेंडाजोल, डीईसी एवं आईवरमेक्टिन का सेवन कराया जायेगा. शेष 14 जिलों में अल्बेंडाजोल एवं डीईसी लोगों को खिलाई जाएगी. उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति एमडीए अभियान के दौरान पांच साल तक लगातार अल्बेंडाजोल एवं डीईसी का सेवन एक बार करता है और अल्बेंडाजोल, डीईसी एवं आईवरमेक्टिन का सेवन दो वर्षों तक एक बार सेवन करता है तो वह व्यक्ति फ़ाइलेरिया से आजीवन सुरक्षित रहता है. डॉ. रावत ने बताया कि अभी राज्य के 24 जिलों में नाईट ब्लड सर्वे संचालित किया जा रहा है जिससे जिलों में माइक्रो फ़ाइलेरिया दर का पता चलेगा.
नेटवर्क सदस्यों ने किया सवाल:
उन्मुखीकरण कार्यक्रम के दौरान जुड़े नेटवर्क सदस्यों ने डॉ. अनुज रावत से सवाल कर अपनी शंकाओं को दूर किया. सारण से जुड़े नेटवर्क सदस्य राम बाबु शर्मा ने पुछा कि नियमानुसार गंभीर रोग से ग्रसित व्यक्तियों को फ़ाइलेरिया की दवा नहीं खिलानी है तो वह गंभीर अथवा असाध्य रोग कौन कौन से हैं. डॉ. रावत ने बताया कि कैंसर, एचआईवी आदि रोग जो प्रायः असाध्य रोग की श्रेणी में आते हैं ऐसे लोगों को दवा नहीं खिलानी है लेकिन अन्य सामान्य रोग जैसे मधुमेह आदि से ग्रसित लोगों को फ़ाइलेरिया की दवा दी जा सकती है. वहीँ गोपालगंज से जुड़ी नेटवर्क सदस्य शांति देवी ने बताया कि अक्सर लोग बोलते हैं कि तीन दवा के बदले फ़ाइलेरिया की एक ही दवा क्यूँ नहीं उपलब्ध है जिसके जवाब में डॉ. रावत ने कहा कि केंद्र सरकार के पास फ़ाइलेरिया के दवाओं की संख्या को कम करने का प्रस्ताव भेजा गया है और हो सकता है कि भविष्य में लोगों को ज्यादा दवाओं का सेवन नहीं करना पड़ेगा. कई अन्य नेटवर्क सदस्यों ने भी कार्यक्रम में अपने सवाल रखे और डॉ. रावत ने सभी के सवालों का जवाब दिया.
कार्यक्रम की समाप्ति पर डॉ. अनुज रावत ने कहा कि नेटवर्क सदस्यों के सवाल दर्शाते हैं कि लोग कितने जागरूक हो चुके हैं और जागरूकता के बल पर ही वर्ष 2027 तक फ़ाइलेरिया उन्मूलन का स्वप्न साकार हो सकता है.
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