एनीमिक गर्भवती महिलाओं को होता है गर्भपात का खतरा बचाव के आयरन का सेवन जरूरी

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  • एनीमिया के कारण गर्भवती महिलाओं को अत्यधिक थकान और सांस की तकलीफें भी हो सकती है
  • संतुलित आहार के साथ आयरन की गोली का करें सेवन
बेतिया : गर्भवस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखना चाहिए, स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है। गर्भवती महिलाओं को संतुलित भोजन के साथ ही चिकित्सक के सलाह के अनुसार सही मात्रा में आयरन, कैल्शियम की दवा का सेवन करना चाहिए- यह कहना है नरकटियागंज अनुमण्डलीय अस्पताल के गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ प्रीति कुमारी का, उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं में शुरुआती तौर पर एनीमिया का होना आम बात है, परन्तु अधिक समय तक रहने पर यह खतरनाक हो जाता है। एनीमिया के कारण जच्चा- बच्चा के स्वास्थ्य पर कुप्रभाव पड़ता है। इससे गर्भ- पात का खतरा बढ़ जाता है।एनीमिया रोग के लक्षण अत्यधिक थकान और सांस लेने में तकलीफें, चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना,सिरदर्द, पीली त्वचा, तेज़ दिल की धड़कन,कम रक्तचाप आदि है।इससे बचने के लिए समय-समय पर गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों से जाँच करानी चाहिए।गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ प्रीति कुमारी ने बताया कि शरीर में खून की कमी को एनीमिया कहते हैं। एनीमिया रोग में शरीर में फॉलिक एसिड, आयरन और बिटामिन B12 की कमी हो जाती है, जिसके कारण शरीर में किसी कारण से जब रेड ब्लड सेल्स में कमी आ जाती है तो व्यक्ति एनीमिया रोग से ग्रसित हो जाता है।
– बच्चे पर भी पड़ता है एनीमिया का असर :
गर्भ में पल रहें बच्चे के स्वास्थ्य पर भी एनीमिया के कारण बुरा असर देखा जाता है।जन्म के समय शिशु का वजन कम होना, कमजोर शिशु, मृत शिशु का जन्म होने के साथ ही
एनीमिया के कारण जच्चा – बच्चा पर संक्रमण का भी खतरा बना रहता है। गर्भावस्था के दौरान परजीवी संक्रमण जैसे हुक वर्म आदि के कारण भी शरीर में खून की  कमी हो जाती है। इसलिए बीमारियों से बचाव करना भी गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है।
– संतुलित आहार के साथ आयरन गोली है कारगर:
जिले के डीसीएम राजेश कुमार ने बताया कि गर्भवती महिला की हर माह प्रसव पूर्व जांच आवश्यक है।
ताकि एनीमिया का पता लगाया जा सके। उन्होंने बताया कि प्रत्येक गर्भवती महिला को कुल 360 आयरन की गोली का सेवन करना चाहिए। 180 गोली प्रसव से पहले व 180 गोली प्रसव के बाद 6 महीने लेनी चाहिए। एनीमिया से बचने के लिए – पालक, हरी सब्जी व मछली, दूध व अंडा आदि का नियमित सेवन। ये शरीर में आयरन की मात्रा को बढ़ाते हैं। सीएस ने बताया कि गर्भावस्था में बहुत अधिक चाय व कॉफी के सेवन से बचना चाहिए। अच्छी नींद लेनी चाहिए। गुड़ और चना का सेवन काफी लाभप्रद होता है। इसके साथ चुकंदर, सूखे मेवे व मौसमी फल जरूर लें।उन्होंने बताया की राज्य में करीब 63 प्रतिशत महिलाएं और 69 प्रतिशत बच्चे (छह से 59 माह तक के) एनीमिया से ग्रसित हैं। प्रसव बाद 42.6 प्रतिशत महिलाएँ एनीमिया से ग्रसित है।
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