चंपारण के रंग- पटल को दशकों सुगंधित करने वाले अजीम फनकार पराग मजुमदार ने सांसारिक लोक को कहा अलविदा

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  •  कोलकाता में ली अंतिम साॅस
  •  कला- जगत में छायी मायूसी
अशोक वर्मा
मोतिहारी : चंपारण के रंग- पटल पर अपनी स्वर लहरियों की खुशबू बिखेर हजारों दिलों पर दशकों राज करने वाले अजीम फनकार पराग मजुमदार ने  सांसारिक लोक को अलविदा कह दिया। उन्होंने कोलकाता में रविवार को अंतिम सांस ली। पराग मजुमदार जैसे लोकप्रिय फनकार के निधन की खबर से चंपारण का कला जगत बेहद मायूस व सदमें में है। उनके निधन पर चंपारण के कलाकर्मी एवं बुद्धिजीवियों ने गहरी संवेदना व्यक्त कीं हैं।
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की वरीय सदस्य डाॅ. नीतू कुमारी नूतन ने कहा कि कला- क्षितिज का नायाब सितारा पराग मजुमदार ने चंपारण के सांस्कृतिक उत्थान में अविस्मरणीय योगदान दिया, जिसे सदियों तक भुलाया नहीं जा सकेगा। उन्होंनेे कहा कि पेशे से पंजाब नैशनल बैंक के अधिकारी रहे पराग का पूरा परिवार भारतीय कला- संगीत व संस्कृति का प्रवर्तक था। चंपारण सांस्कृतिक महोत्सव समिति की वर्किंग प्रेसिडेंट डाॅ. चंद्रलता झा ने कहा कि पराग का व्यक्तित्व उनके नाम के बिल्कुल अनुरुप  व पर्यायवाची था। वे बेहद हँसमुख, बेबाक, ह्रदय से पवित्र तथा आम कलाकारों की मदद को सदैव तत्पर रहा करते थे। डाॅ. स्वस्ति सिन्हा ने कहा कि वर्ष 1980 – 95 के बीच चंपारण के रंगमंच के सशक्त फनकार पराग की गिनती शीर्ष कलाकारों में होती थी तथा उनकी धमक से यहाँ के रंगमंच जीवंत हो उठते थे। मुंशी सिंह काॅलेज के प्राचार्य प्रो. (डाॅ.)अरुण कुमार ने कहा कि अखिल भारतीय स्तर की सांस्कृतिक गतिविधियों व विरासत के संरक्षक- संपोषक पराग ने नवांकुर कला- प्रतिभाओं को अपने स्नेहाशीष व आशीर्वचन की छाँव दे सिंचित कर नई पीढ़ी की रचना की। डाॅ. अतुल कुमार ने कहा कि पराग दादा का चाॅदमारी दुर्गा मंदिर स्थित निवास चंपारण के कला-शिल्पकार व कलाकर्मियों का रैन – बसेरा हुआ करता था, जहाँ प्राय: संगीत की महफिलें खूब सजा करतीं थीं। वरीय संस्कृतिकर्मी संजय पाण्डेय ने कहा कि पंजाब नैशनल बैंक में सेवा के साथ कला जगत में उनके अप्रतिम योगदान सदैव याद किया जाएगा। अनिल वर्मा ने कहा बैंक की सेवा से अवकाश के पश्चात पराग दादा ने स्थाई तौर पर कोलकता में अपना आशियाना बना लिया।
           शोक व्यक्त करने वालों में   शैलेंद्र सिन्हा, सुरेंद्र देव, प्रो. दिवाकर नारायण पाठक,अशोक कुमार वर्मा आदि प्रमुख हैं।
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