अद्भुत वीरता का परिचय देते हुए अंग्रेजों को धूल चटाने वाले वीर बाबू वीर कुंवर सिंह थे:- माननीय कुलपति महोदय, प्रो. संजय कुमार चौधरी।

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राजेश मिश्रा की रिपोर्ट
  • बाबू वीर कुँवर सिंह विजयोत्सव, कुँवर सिंह महाविद्यालय, लहेरियासराय में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। 
लनामिवि दरभंगा:- स्वतंत्रता आंदोलन में स्वतंत्रता सेनानियों की अग्रणी भूमिका के लिये बिहार सदैव याद किया जायेगा। उन्हीं में से एक हैं बाबू वीर कुंवर सिंह। ये उनके वीरता का ही निशानी है कि वो वीर कुंवर सिंह के नाम से जाने जाते हैं। 80 वर्ष के उम्र में उन्होंने अद्भुत वीरता व अदम्य साहस का परिचय देते हुए अंग्रेजों को धूल चटाया था। 23 अप्रैल 1858 को अंग्रेजों से लड़ते हुए बुरी तरह घायल अवस्था में भी उन्होंने जगदीशपुर किले से “यूनियन जैक” नाम का झंडा उतारकर जगदीशपुर को स्वतंत्र कराया। इसीलिए प्रतिवर्ष इस दिन *”विजयोत्सव दिवस”* के रूप में मनाया जाता है। वीर कुंवर सिंह के जीवन व अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की गाथा से सीख लेकर छात्रों को अपने जीवन में वैसा ही त्याग और राष्ट्र प्रेम की भावना जगाना चाहिये। उक्त बातें बतौर मुख्य अतिथि मिथिला विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय प्रो. संजय कुमार चौधरी ने *”विजयोत्सव दिवस”* के अवसर पर कुंवर सिंह महाविद्यालय, लहेरियासराय के सभागार में कही। आगे उन्होंने सभागार में जय हिंद का नारा बुलंद करके सभागार में उपस्थित लोगों में एक अलग ऊर्जा का संचार किया।
      इस अवसर पर “*सेनानी*” पत्रिका का भी माननीय कुलपति महोदय ने विमोचन किया और पत्रिका की प्रशंसा किया। आगे सलाह देते हुए उन्होंने भविष्य में बच्चों के बीच विभिन्न शैक्षणिक प्रतियोगिता का आयोजन कर उत्कृष्ट निबंधों को अधिक संख्या में संकलन कर अगले अंकों में छापने का निर्देश दिया।
       विशिष्ट वक्ता कुंवर सिंह महाविद्यालय के हिंदी विभाग के मूर्धन्य विद्वान डॉ. संजीव कुमार ने बाबू वीर कुंवर सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को एक अलग कलेवर में प्रस्तुत किया। चापलूस इतिहासकारों के कारण राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका को वास्तविक अर्थों में उभरने नहीं दिया गया लेकिन बिहार राष्ट्रभाषा परिषद के द्वारा के. के. दत्त की पुस्तक कुंवर सिंह अमर सिंह प्रकाशित हुई तब कुंवर सिंह 1857 स्वतंत्रता संग्राम के महानायक के रूप में उभरे। इसके साथ ही डॉ. कुमार के द्वारा महाविद्यालय की स्थापना एवं उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महान विभूतियों की विशद चर्चा की।
   मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार बच्चन ने कुंवर सिंह की वीरगति को महान बलिदान बताया। इसी क्रम में सिंडिकेट सदस्य प्रो. बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने अपने संबोधन में बाबू साहेब के 80 वर्षों के होने पर भी अपने राष्ट्र प्रेम दिखा बलिदान देकर अंग्रेजों के दांत खट्टे कर हम सभी का प्रेरणा स्रोत बने इत्यादि अनेक बातें कही।
       कार्यक्रम के स्वागताध्यक्ष प्रधानाचार्य प्रो. लक्ष्मण प्रसाद जायसवाल ने आगत अतिथियों को स्वागत किया साथ ही बाबू वीर कुंवर सिंह की मर्दांनगी की चर्चा करते हुए उनसे हम सब को सीख लेने के लिए प्रेरित किया।
      इस कार्यक्रम का मंच संचालन हिंदी विभाग की श्रीमति रश्मि शर्मा ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, स्थानीय महाविद्यालय के प्रधानाचार्य एवं महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, अवकाश प्राप्त शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी, महाविद्यालय के संस्थापक स्व. ब्रह्मानंद सिंह की सुपुत्री डॉ. मधुरिमा सिंह के साथ-साथ मीडिया प्रभारी डॉ. अवनीश कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। छात्र-छात्राओं की उपस्थिति भी बहुत ही रंग लाई। इस कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शंभू कांत झा ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में इस महाविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ. जय कुमार झा की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
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