मोतिहारी, वाह रे शिक्षा विभाग : विधालयों में बेंच-डेस्क के आपूर्ति व गुणवत्ता की भौतिक सत्यापन के बिना ही कर दिया गया वेंडरों के बीच करोड़ों का भुगतान, भुगतान 31 मार्च को और सत्यापन 1 अप्रैल से..

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Live News 24 x 7 के लिए मोतिहारी से कैलाश गुप्ता की रिपोर्ट।

एक तरफ शिक्षा विभाग के आला अधिकारी केके पाठक विभाग को भ्रष्टाचार मुक्त व कदाचार मुक्त करने के लिए प्रतिज्ञारत है तो दूसरी तरफ इनके अधीनस्त अधिकारी लाखों का वारा न्यारा करने के लिए सभी नियमों को ताक पर रख कर कार्य करने में व्यस्त है। विधालयों का दशा सुधारने के लिए आला अधिकारी केके पाठक द्वारा राज्य के सभी विधालयों में बेंच-डेस्क की आपूर्ति के लिए अरबों रुपये हर जिले को आवंटित किए गए और गुणवत्तापूर्ण कार्य के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी को विशेष अधिकार भी दिया गया। जिला शिक्षा पदाधिकारी व राज्य स्तर से विधालयों में बेंच-डेस्क की आपूर्ति के लिए वेंडर नियुक्त कर आपूर्ति आदेश निगर्त किया गया।

पूर्वी चम्पारण के जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा जारी आपूर्ति आदेश संख्या 588 दिनांक 21.2.24 में स्प्ष्ट निर्देश दिया गया है कि..

1, विभागीय विशिष्टता के अनुरूप ही बेंच-डेस्क क्रय किया जाना है।

2, डेस्क के बीच में किताब रखने हेतु एक पटरा लगाना अनिवार्य होगा।

3, कहा गया है कि लकड़ी के बेंच डेस्क में प्रायः ऐसी सूचना प्राप्त हो रही है कि लकड़ी में शीशम की लकड़ी का उपयोग नही किया जा रहा है, विभागीय निर्देश के आलोक में निर्धारित लकड़ी से इतर लकड़ी का उपयोग नही किया जाना है। अतः लकड़ी का बेंच डेस्क बिना पेंट किया हुआ ही विद्यालय में आपूर्ति कराया जाएगा एवं पेंट विद्यालय स्तर पर किया जाएगा।

4, लकड़ी/लोहे/एम.डी. एफ. बोर्ड से बने बेंच डेस्क की गुणवत्ता की जांच संबंधित कनीय अभियंता द्वारा की जाएगी।

5, सभी बेंच डेस्क पर विद्यालय का नाम एवं संख्या प्रिंट कराना अनिवार्य होगा। वही स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि किसी एजेंसी द्वारा आपूर्ति किये गए बेंच डेस्क की गुणवत्ता में यदि कोई गड़बड़ी पायी जाती है तो संबंधित एजेंसी की संबद्धता रद्द करते हुए उसे काली सूची में डाल दी जाएगी तथा उसके विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद देखा जा रहा है कि विधालयों में आपूर्ति किए गए बेंच डेस्क में गुणवत्ता से दूर दूर तक नाता-रिस्ता नहीं है।

गौरतलब है कि स्वयं जिला शिक्षा पदाधिकारी पूर्वी चम्पारण के द्वारा पत्र जारी कर विद्यालयों व वेंडरो को शख्त हिदायत दिया गया कि विभागीय विशिष्टता के अनुरूप ही बेंच-डेस्क क्रय किया जाना है और गुणवत्ता की जांच करने के लिए संबंधित कनीय अभियंताओं को निर्देशित किया गया है।

इसके बावजूद सूत्रों से मिली सूचनानुसार वेंडरो द्वारा छिट-पुट विद्यालयों में मानक के विपरीत व निर्धारित संख्या से कम संख्या में ही आपूर्ति की गई है तथा संबंधित अधिकारी व प्रधानाध्यापकों से साठ-गांठ कर विपत्र का भुगतान भी करा लिया गया है। वही बताया जाता है कि वेंडरो से 10 से 13 प्रतिशत तक कि राशि लेकर विद्यालय व संबंधित अधिकारी द्वारा विपत्र पास किया गया है।

मजे की बात तो यह है कि भुगतान 31 मार्च को करने के बाद की तिथि 01 अप्रैल से 10 अप्रैल तक आपूर्ति किये गए बेंच डेस्क की गुणवत्ता की जांच करने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा एक पत्र  1013 दिनांक 22.3.24 से जारी कर सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, सभी कनीय अभियंता, सभी बीपीएम तथा सभी बीआरपी की आदेश दिया गया है जिसमें कहा गया है कि दिनांक 01.04.24 से 10.04.24 के बीच टीम बनाकर अपने अपने प्रखंड के विद्यालय में आपूर्ति की गई बेंच डेस्क की गुणवत्ता/संख्या की जांच/भौतिक सत्यापन करना सुनिश्चित किया जाय।

31 मार्च तक बिना सत्यापन कराए वेंडरों के बीच करोड़ों रुपये का भुगतान करना और 22 मार्च 24 को पत्र जारी 1 अप्रैल से जांच कराना यह स्पष्ट करता है कि बेंच-डेस्क की आपूर्ति में संबंधित वेंडरों, अधिकारियों व प्रधानाध्यापकों के बीच लाखों का वारा न्यारा किया गया है।

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