पंडित छोटेलाल मिश्र संगीत महाविद्यालय ने किया ठुमरी महोत्सव

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अशोक वर्मा
 मोतिहारी : आज स्थानीय राजेंद्र नगर भवन के प्रशाल में पं.छोटेलाल मिश्र संगीत कला महाविद्यालय के
वार्षिकोत्सव के अवसर पर शानदार “ठुमरी महोत्सव”का आयोजन संपन्न हुआ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सह उद्घाटनकर्ता 71 वीं बटालियन एस. एस.बी. पीपराकोठी के कमांडेंट प्रफुल्ल कुमार सिंह,शास्त्रीय संगीत संरक्षक प्रो.शोभाकांत चौधरी,प्रख्यात लोकगायिका चमेली पाण्डेय,प्रसिद्ध राम कथा वाचक डॉ.रामनिरंजन पाण्डेय और संस्था के निदेशक शैलेंद्र कुमार सिन्हा ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कमांडेंट प्रफुल्ल कुमार सिंह ने कहा कि इस ढंग के सांस्कृतिक आयोजनों से जन रुचियों का परिष्कार होता है और संस्कृति अपनी जड़ों की ओर लौटती है।उन्होंने कार्यक्रम की भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे सुरुचि संपन्न कार्यक्रमों का आयोजन कला और संस्कृति के उत्थान की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्रम प्रदान कर किया गया।इस अवसर पर पंडित छोटेलाल मिश्र संगीत कला महाविद्यालय द्वारा वर्ष 2024 का लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड कला और शास्त्रीय संगीत के संरक्षण के लिए प्रो.शोभाकान्त चौधरी को और लोकसंगीत के संरक्षण के लिए श्रीमती चमेली पाण्डेय को दिया गया।विदित हो कि “वीणावादिनी संगीत संस्थान”के माध्यम से प्रो.चौधरी ने चंपारण में अनेक सांगीतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया।  चमेली पाण्डेय ने अपनी लोकगायिकी और आकाशवाणी से प्रसारणों द्वारा लोकसंगीत को समुचित गति प्रदान की।चमेली पाण्डेय को भी संस्था द्वारा लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया।
       कजरी महोत्सव का श्रीगणेश पंडित छोटेलाल मिश्र संगीत कला महाविद्यालय के छात्र छात्राओं द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुआ जिसकी प्रस्तुति में तनूजा,प्रीति,सलोनी,अनुष्का,चांद,सृष्टि अनन्या और सुप्रिया राज श्रीवास्तव का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
                ठुमरी महोत्सव की शुरुआत दुर्गापुर(बंगाल)से पधारीं सुप्रसिद्ध गायिका काकली मुखर्जी के ठुमरी गायन से हुई।अपनी पहली प्रस्तुति उन्होंने राग मारू विहाग पर आधारित बंदिश “सांझ भई घर आ जा ” से किया। जत ताल 16 मात्रा में निबद्ध इस बंदिश को श्रोताओं द्वारा अत्यंत सराहना मिली।इनकी दूसरी प्रस्तुति”अजहूं न आए हमारे सैयां, जिया नहीं माने, मैं का करूं गुइयां”बारहमासा से किया जिसमें नायिका द्वारा ऋतु परिवर्तन के साथ विरह के दर्द को बड़े सुंदर ढंग से बिखेरा गया।ताल दादरा में निबद्ध इस गीत की ऐसे सलीके से प्रस्तुत किया गया की श्रोता मदमस्त हो गए।उन्होंने और भी कई विधाओं में अपनी प्रस्तुतियों द्वारा महफिल को गुलजार कर दिया।
 इनके साथ तबले पर कुशल संगति प्रदान की बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पधारे सुप्रसिद्ध तबला वादक डॉ.रजनीश तिवारी ने,सारंगी पर वाराणसी से ही पधारे पंडित अनीस मिश्र ने और हारमोनियम पर पंडित राधेश्याम शर्मा ने।ठुमरी महोत्सव की दूसरी प्रस्तुति थी बनारस घराने की सुप्रसिद्ध गायिका  डॉ. सुचरिता गुप्ता की। डॉ.सुचरिता ने अपने ठुमरी गायन का आगाज़ होली पर आधारित”कौन तरह तुम खेलत होरी”राग सिंदूरा जत ताल 16 मात्रा में गाकर उपस्थित श्रोताओं को रस विभोर कर दिया।इनकी दूसरी प्रस्तुति राग मिश्र खमाज में निबद्ध और ताल दादरा 6 मात्रा में गुम्फित”कोई अचक लचक मोहन मूर्ति आवे रे”की प्रस्तुति पर लोग बाग झूम उठे।इसके पश्चात उन्होंने राग शहाना में निबद्ध और दीपचंदी ताल में”होली खेलूंगी  मैं श्याम से डट के”की प्रस्तुति से संपूर्ण वातावरण को होली के रंग में रंगने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।उन्होंने अपनी अंतिम प्रस्तुति में बनारस के प्रसिद्ध दादरा “हमरी अटरिया पे आजा रे सांवरिया,देखा देखी तनिक हो जाई”गाकर पूरी महफिल को जीतने का कार्य किया।उनके गले में बनारस की संगीत परंपरा पूरे दम खम  के साथ उभरती हुई व्यक्त हो रही थी। सुचरिता गुप्ता के साथ कुशल संगति प्रदान की तबले पर बनारस घराने के सुप्रसिद्ध तबला वादक पंडित ललित कुमार ने,सारंगी पर पंडित अनीस मिश्र ने और हारमोनियम पर वाराणसी से पधारे पंडित राघवेंद्र शर्मा ने।कुल मिलाकर आज का यह ठुमरी महोत्सव अपनी उपलब्धियों में अनोखा और शानदार रहा। काफी दीर्घावधि के बाद चंपारण में इस तरह की सुर ताल की महफिल ने श्रोताओं को चैन और सुकून से भरने और सांस्कृतिक माहौल प्रदान करने का एक सुंदर और सुरीला अवसर प्रदान किया।समस्त कार्यक्रम का भावपूर्ण संचालन एम. एस.कॉलेज के प्राचार्य प्रो.(डॉ.)अरुण कुमार ने किया।
क्लासिकल को समर्पित ठुमर महोत्सव ने एक बार की पुण:. मोतिहारी के गांधी मैदान में आयोजित होने वाले  ऑल इंडिया म्यूजिक कॉन्फ्रेंस की स्मृति दिला दी जब बड़े ही लोग चाव से रात भर जागकर गांधी के मैदान में शास्त्रीय गायन एवं कार्यक्रम का आनंद लेते थे
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